फरीदकोट: मूल रूप से फरीदकोट के गांव कासम भट्टी के रहने वाले और वर्तमान में सरी, ब्रिटिश कोलंबिया (कनाडा) में बतौर वकील प्रैक्टिस कर रहे 49 वर्षीय अजयपाल सिंह धालीवाल ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट ($8,848.86$ मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा और अपना परचम लहराया है। वह यह मुकाम हासिल करने वाले पहले कनाडाई पंजाबी/सिख पर्वतारोही बन गए हैं।
इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद गांव लौटने पर फरीदकोट के डीसी राहुल चाबा ने अजयपाल सिंह धालीवाल को विशेष तौर पर सम्मानित किया।
‘डेथ ज़ोन’ में छूटा शेरपा का साथ, ऐसे जीती मौत से जंग
अजयपाल धालीवाल के लिए यह सफर सिर्फ एक चढ़ाई नहीं, बल्कि मौत के मुंह से बाहर निकलने की दास्तान है। उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया:
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पिछले साल की नाकामी से लिया सबक: वह कई सालों से इसकी तैयारी कर रहे थे। पिछले साल भी कोशिश की थी, लेकिन असफल रहे। हार न मानते हुए उन्होंने 20 मई 2026 को आखिरकार एवरेस्ट फतह कर लिया।
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8,000 मीटर ऊपर संकट: असली परीक्षा चोटी से वापस उतरते समय शुरू हुई। 8,000 मीटर से ऊपर का इलाका, जिसे ‘डेथ ज़ोन’ कहा जाता है, वहां शेरपा ने उनका साथ छोड़ दिया और उनकी ऑक्सीजन भी खत्म होने लगी। इसी अभियान के दौरान दो अन्य पर्वतारोहियों (संदीप अरे और अरुण कुमार तिवारी) की जान भी चली गई थी।
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बर्फीली ढलान से फिसलने का जोखिम: भयंकर ठंड और सांस उखड़ने के बावजूद अजयपाल ने हौसला रखा। उन्होंने सेफ्टी बेल्ट की मदद से बर्फीली ढलानों से फिसलकर नीचे उतरने का जानलेवा जोखिम लिया।
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बेहोशी और रेस्क्यू: इस दौरान वे गिरकर बेहोश हो गए। जब होश आया, तो उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए अपने हेडलैंप को जलाकर मदद के संकेत दिए। इसके बाद मिंगमा तेंजिंग शेरपा की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय टीम ने उन्हें देखा और ऑक्सीजन देकर सुरक्षित नीचे पहुंचाया।
एवरेस्ट की चोटी पर दिया ‘सरबत दा भला’ का संदेश
धालीवाल ने बताया कि एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने वहां एक छोटा फ्लैक्स (बैनर) लगाया, जिस पर गुरुबाणी की पवित्र पंक्तियां अंकित थीं:
“नानक नाम चढ़ਦੀ कला, तेरे भाणे सरबत ਦਾ भला”
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब ‘डेथ ज़ोन’ में स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी, तब उन्हें केवल वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था और इसी अटूट विश्वास के कारण वे आज जिंदा वापस लौट सके हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत: ‘आयरन मैन’ हैं अजयपाल
फरीदकोट के डीसी राहुल चाबा ने अजयपाल की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि पूरे पंजाबी और सिख समुदाय के लिए बेहद गर्व की बात है।
उन्होंने बताया कि धालीवाल सिर्फ पर्वतारोही नहीं हैं, बल्कि:
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वे इससे पहले भी दुनिया के कई मशहूर पहाड़ों को फतह कर चुके हैं।
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वे एक बेहतरीन मैराथन धावक (Runner) हैं।
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वे कठिन मानी जाने वाली ट्रायथलॉन को पूरा करके ‘आयरन मैन’ का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं।
डीसी ने कहा कि अजयपाल का यह जज्बा आज के युवाओं को यह संदेश देता है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो हर नामुमकिन दिखने वाली मंजिल को हासिल किया जा सकता है। इस सम्मान समारोह के दौरान जेल सुपरिटेंडेंट इकबाल सिंह धालीवाल भी विशेष रूप से मौजूद रहे।