चंडीगढ़: पंजाब की बोर्ड परीक्षाओं (8वीं, 10वीं और 12वीं) में टॉप करने वाले मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर है। राज्य सरकार ने रैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा फेरबदल किया है। अब यदि दो या दो से अधिक छात्रों के परीक्षा में एक समान अंक (Marks) आते हैं, तो उनकी रैंकिंग जन्मतिथि (Date of Birth) के आधार पर तय नहीं की जाएगी। ऐसे सभी विद्यार्थियों को अब समान रैंक दी जाएगी और बराबर सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक छात्रा की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेते हुए यह फैसला किया।
‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम में अमृतसर की छात्रा ने उठाया था मुद्दा
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के टॉपर्स के सम्मान में ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर रहे थे। इसी बीच अमृतसर की एक छात्रा ने वर्तमान रैंकिंग सिस्टम की एक बड़ी विसंगति को उजागर किया:
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500 में से 500 अंक, फिर भी भेदभाव: छात्रा ने बताया कि आठवीं कक्षा की परीक्षा में अमृतसर जिले की तीन छात्राओं ने पूरे 500 में से 500 अंक हासिल किए थे।
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उम्र बनी रुकावट: अंक और मेहनत बिल्कुल बराबर होने के बावजूद, केवल जन्मतिथि (उम्र में छोटी-बड़ी होने) के आधार पर उन्हें पहला, दूसरा और तीसरा स्थान (रैंक) दे दिया गया।
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सम्मान से रह गईं वंचित: इस पुरानी व्यवस्था के कारण केवल पहली रैंक पाने वाली छात्रा को ही स्टेज पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने का मौका मिला, जबकि बाकी दो छात्राएं समान प्रदर्शन के बाद भी पीछे छूट गईं।
छात्रा ने सवाल उठाया कि जब प्रतिभा और अंक समान हैं, तो केवल उम्र के आधार पर किसी को पीछे रखना कहाँ का न्याय है? छात्रा के इस तर्क पर हॉल में मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजाकर उसका समर्थन किया।
मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को दिए आदेश
छात्रा की दलील और सूझबूझ से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बिना देर किए मंच से ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को नियमों में बदलाव करने के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया:
“भविष्य में यदि किसी भी बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों के अंक समान होंगे, तो सभी को संयुक्त रूप से एक जैसी रैंक दी जाएगी। सफलता का पैमाना विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और उनका प्रदर्शन होना चाहिए, न कि उनकी जन्मतिथि। उनके सम्मान में सरकार की तरफ से कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।”
मनीष सिसोदिया और शिक्षा मंत्री ने भी थपथपाई पीठ
इस खास सम्मान समारोह में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया भी विशेष रूप से मौजूद थे।
छात्रा की सराहना करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा:
“यह बदलाव ही असल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) की पहचान है। आज हमारी शिक्षा प्रणाली बच्चों में इतना आत्मविश्वास पैदा कर रही है कि वे व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीधे मुख्यमंत्री के सामने आवाज उठा सकते हैं। शिक्षा में निष्पक्षता और सबको समान अवसर मिलना सबसे जरूरी है।”
छात्रों और अभिभावकों ने बताया ऐतिहासिक कदम
पंजाब सरकार के इस त्वरित और संवेदनशील फैसले की छात्र, शिक्षक और अभिभावक वर्ग जमकर तारीफ कर रहे हैं। इसे एक सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में समान अंक लाने वाले बच्चों को रैंकिंग के नाम पर मानसिक तनाव या किसी भी प्रकार के भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।