जालंधर: छह साल पहले मोबाइल छीनकर भाग रहे लुटेरों का अकेले पीछा कर उनसे भिड़ने वाली जालंधर की बहादुर बेटी कुसुम को आखिरकार इंसाफ मिल गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदर सिंह राय की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने अविनाश कुमार उर्फ आशू और विनोद कुमार उर्फ झिका को कुसुम से मोबाइल छीनने और उस पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोषी करार दिया। अविनाश कुमार पर 70 हजार रुपये और विनोद कुमार पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मोबाइल छीनकर भागे थे लुटेरे, कुसुम ने किया पीछा
यह घटना 30 अगस्त 2020 की है। उस समय कुसुम आठवीं कक्षा में पढ़ती थी और जालंधर के फतेहपुरी मोहल्ले की रहने वाली थी। ट्यूशन से घर लौटते समय बाइक सवार दो युवकों ने उसके हाथ से मोबाइल छीन लिया और फरार होने लगे।
मोबाइल लेकर भागते लुटेरों को देखकर कुसुम ने हिम्मत नहीं हारी और उनका पीछा शुरू कर दिया। जब एक आरोपी बाइक पर बैठकर भागने की कोशिश कर रहा था, तो कुसुम ने उसकी कमीज पकड़ ली।
दातर से किया हमला, फिर भी नहीं छोड़ा लुटेरा
खुद को फंसा देखकर आरोपी ने कुसुम से पीछा छुड़ाने के लिए दातर निकाल लिया और उसकी कलाई पर वार कर दिया। हमले में कुसुम की हाथ की नसें कट गईं और काफी खून बहने लगा।
इसके बावजूद कुसुम ने आरोपी को नहीं छोड़ा। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मौके पर पहुंचे। लोगों ने एक आरोपी को पकड़ लिया, जबकि दूसरा बाइक लेकर फरार हो गया।
बाद में पुलिस ने दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। करीब छह साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
भाई ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए खरीदकर दिया था मोबाइल
कुसुम के लिए यह मोबाइल महज एक फोन नहीं था। कोरोना काल में स्कूलों की पढ़ाई ऑनलाइन होने के कारण उसके भाई ने करीब दो महीने पहले अपनी बचत से लगभग 12 हजार रुपये खर्च कर उसके लिए मोबाइल खरीदा था।
कुसुम के पिता उस समय पल्लेदारी का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुसुम को डर था कि अगर मोबाइल चला गया तो परिवार के लिए दोबारा महंगा फोन खरीदना मुश्किल होगा और उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है।
कुसुम ने स्कूल में ताइक्वांडो की ट्रेनिंग भी ली थी। इसी प्रशिक्षण ने मुश्किल समय में उसका हौसला बढ़ाया और उसने निहत्थे ही लुटेरों का सामना करने का फैसला किया।
राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से हो चुकी है सम्मानित
घटना के समय कुसुम की उम्र करीब 15 साल थी। घायल होने के बावजूद लुटेरे को पकड़ने और मोबाइल वापस लेने की उसकी बहादुरी की खूब चर्चा हुई। तत्कालीन डीसी घनश्याम थोरी ने कुसुम को राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार के लिए नामांकित किया था।
कोरोना काल के बाद 2023 में कुसुम को राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंजाब सरकार ने भी उसकी बहादुरी को सम्मान दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उसे एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया था। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर ने भी उसे सम्मानित करने के साथ नया मोबाइल फोन दिया था।
कौन है मुख्य दोषी?
अविनाश कुमार उर्फ आशू जालंधर के बस्ती दानिशमंदा स्थित मोहल्ला बेगमपुरा का रहने वाला है। मामले में उसे मुख्य आरोपी माना गया। आरोप के मुताबिक, उसी ने कुसुम पर दातर से हमला किया था। कुसुम ने उसे वारदात के बाद मौके पर पकड़ लिया था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा भी लगाई गई थी।
विनोद कुमार उर्फ झिका जालंधर के मॉडल टाउन स्थित संत भाग सिंह नगर का रहने वाला है। वारदात के समय वही मोटरसाइकिल चला रहा था। कुसुम द्वारा अविनाश को पकड़ लिए जाने के बाद विनोद मौके से फरार हो गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
छह साल बाद आए इस फैसले ने कुसुम की बहादुरी की कहानी को एक नया अध्याय दिया है। जिस उम्र में बच्चे अपनी पढ़ाई और खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में कुसुम ने जान की परवाह किए बिना लुटेरों का सामना किया था।


