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Kajal Dhochak: 18 साल की भारतीय पहलवान ने रचा इतिहास, कोच ने सचिन तेंदुलकर से की तुलना

नई दिल्ली: भारतीय महिला कुश्ती में 18 वर्षीय काजल ढोचक ने अपनी शानदार प्रतिभा से इतिहास रच दिया है। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में काजल ने रजत पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया। 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में उनका सामना यूक्रेन की 24 वर्षीय पहलवान अनास्तासिया अल्पयेयेवा से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन आखिरी क्षणों में काजल को 8-6 से हार का सामना करना पड़ा। वह स्वर्ण पदक जीतने से महज कुछ कदम दूर रह गईं।

काजल की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि वह पहली बार सीनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही थीं। इतनी कम उम्र में फाइनल तक पहुंचना उनकी मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

कोच ने सचिन तेंदुलकर से की तुलना

काजल ढोचक पहले ही अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में दो बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित कर चुकी हैं। सीनियर स्तर पर अपने पहले ही प्रयास में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचकर उन्होंने भारतीय कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई है।

भारतीय महिला कुश्ती टीम के मुख्य कोच वीरेंद्र दहिया भी काजल की प्रतिभा से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने काजल की तुलना महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से करते हुए कहा कि उनमें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की वैसी ही भूख है।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में दहिया ने सचिन के शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रतिभा के साथ कुछ कर दिखाने का जुनून भी जरूरी होता है। उनके मुताबिक, काजल में भी आगे बढ़ने और लगातार खुद को बेहतर बनाने की यही ललक दिखाई देती है।

चाचा से मिली कुश्ती की शुरुआती ट्रेनिंग

हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली काजल ढोचक की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान है। उन्होंने कुश्ती की शुरुआती ट्रेनिंग अपने चाचा कृष्णा मलिक से हासिल की, जो खुद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं।

चोट के कारण जब कृष्णा मलिक का कुश्ती करियर प्रभावित हुआ, तो उन्होंने परिवार के अन्य बच्चों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसी दौरान काजल को भी कुश्ती सीखने का अवसर मिला और धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई।

काजल के पिता ने भी उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए परिवार को गांव से सोनीपत शहर में बसाया, ताकि बच्चों की पढ़ाई और अन्य सुविधाओं में आसानी हो सके। पढ़ाई में अच्छी होने के बावजूद काजल ने महज 11 साल की उम्र में कुश्ती को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया था।

छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धि, अब स्वर्ण पदक पर नजर

काजल ने अंडर-20 स्तर पर दो विश्व खिताब जीतने के बाद सीनियर विश्व चैंपियनशिप में भी अपनी क्षमता का परिचय दिया है। हालांकि फाइनल में उन्हें स्वर्ण पदक से चूकना पड़ा, लेकिन रजत पदक के साथ उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए बड़ी उपलब्धि है।

18 साल की उम्र में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचना काजल के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। अब उनसे आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का साथ और खेल के प्रति दृढ़ संकल्प किसी भी खिलाड़ी को बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकते हैं।

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