ग्लासगो: गंभीर चोट, महामारी का दौर और टीम से बाहर रहने का लंबा इंतज़ार—इन तमाम बाधाओं को पार करते हुए भारतीय वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में धमाकेदार वापसी की है। रविवार को पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में 26 वर्षीय राजा ने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया।
यह भारत के लिए प्रतियोगिता के इस दिन का तीसरा पदक रहा। इससे पहले मीराबाई चानू ने (48 किग्रा) में लगातार तीसरा गोल्ड और चनामबम ऋषिकांत सिंह ने (60 किग्रा) में सिल्वर मेडल जीता था।
ऐसा रहा राजा मुथुपांडी का प्रदर्शन
राजा ने मुकाबले में बेहद संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया:
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स्नैच: दूसरे प्रयास में 126 किलोग्राम वजन उठाया।
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क्लीन एंड जर्क: दूसरे प्रयास में 160 किलोग्राम सफलतापूर्व उठाया।
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कुल वजन: 286 किलोग्राम उठाकर दूसरा स्थान (सिल्वर मेडल) हासिल किया।
इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनिल बिन बिदिन मुहम्मद ने कुल 299 किलोग्राम वजन उठाकर जीता, जो कि एक नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड है।
जब चोट और कोरोना ने खतरे में डाला करियर
राजा मुथुपांडी की यह सफलता सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उनके अटूट हौसले का प्रतीक है:
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2019 की चोट: कोहनी के लिगामेंट में आई गंभीर चोट की वजह से उनका करियर लगभग खत्म होने की कगार पर पहुँच गया था।
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महामारी की मार: कोरोना काल ने उनकी रिकवरी और प्रैक्टिस को काफी प्रभावित किया।
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टीम से बाहर: भार वर्ग में बदलाव और जेरेमी लालरिननुंगा जैसे खिलाड़ियों के आने से वह 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं बन पाए थे।
65 किग्रा वर्ग में शानदार वापसी
निराश होने के बजाय राजा ने नए 65 किलोग्राम वर्ग में अपनी मेहनत जारी रखी। साल 2025 की विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 299 किलोग्राम वजन के साथ नौवां स्थान हासिल किया था। उसी निरंतर मेहनत का परिणाम आज ग्लासगो के मंच पर रजत पदक के रूप में भारत के सामने है।


