नई दिल्ली: कभी परिवार का पेट पालने के लिए 150 से 200 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले ऋषिकांत सिंह ने आज अपनी मेहनत के दम पर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 60 किग्रा वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने स्नैच राउंड में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम वजन उठाया। हालांकि, अपने अंतिम प्रयास में वह 151 किलोग्राम का वजन उठाने से चूक गए, जिससे उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
जब डाइट और दूध के लिए तरसते थे ऋषिकांत
आज भले ही ऋषिकांत की सफलता की गूंज हर तरफ है, लेकिन उनका सफर कांटों भरा रहा है। एक समय ऐसा था जब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें लगा कि उनका खेल करियर पूरी तरह खत्म हो चुका है। निराशा के दौर में उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों से भी संपर्क तोड़ लिया था। वे बताते हैं कि रोजाना सिर्फ 150-200 रुपये की मजदूरी में परिवार चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में एक एथलीट के लिए जरूरी डाइट, दूध या अंडे जुटाना लगभग असंभव था। कई बार उन्हें भूखे पेट रहना पड़ता था और जो भी घर में बनता, उसी से गुजारा करना पड़ता था। मजबूरन उन्हें कुछ समय के लिए अपने सपनों को साइड में रखकर काम में जुटना पड़ा।
ताक्येल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने बदली किस्मत
ऋषिकांत की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उन्हें ताक्येल स्थित वेटलिफ्टिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग का मौका मिला। यहाँ सही मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलते ही उन्होंने नए सिरे से जी-तोड़ मेहनत शुरू की। इसका नतीजा यह रहा कि महज एक साल के भीतर उन्होंने अपना पहला सीनियर नेशनल खिताब जीत लिया। इसके बाद साल 2025 में अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 60 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।
कोच को दिया सफलता का श्रेय
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड से चूकने के बावजूद ऋषिकांत अपनी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने कोच विजय शर्मा को दिया। ऋषिकांत ने कहा कि कोच ने उनकी ट्रेनिंग और मानसिक तैयारी पर काफी काम किया, जिससे उनका आत्मविश्वास वापस लौटा। अभावों और संघर्षों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाले ऋषिकांत सिंह की यह कहानी आज हर उस युवा के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर कुछ बड़ा हासिल करना चाहता है।


