इंफाल: ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार तीसरा गोल्ड मेडल (हैट्रिक) और कुल मिलाकर चौथा पदक है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उन्होंने गेम्स और कॉमनवेल्थ स्नैच के नए रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।
मीराबाई की इस उपलब्धि पर जहाँ देश भर से बधाइयों का ताँता लगा, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई पोस्ट पर 14 वर्षीय मणिपुर की पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम के रीपोस्ट ने एक नई बहस छेड़ दी है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई
मीराबाई चानू की इस बड़ी कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर बधाई देते हुए लिखा:
“भारतीय वेटलिफ्टिंग में एक और शानदार अध्याय! प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए और गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की। लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल और कुल मिलाकर चौथा CWG मेडल जीतने वाली मीराबाई हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। उन्हें बधाई और भविष्य के प्रयासों के लिए ढेरों शुभकामनाएं।”
14 वर्षीय लिसिप्रिया कंगुजम ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री के इसी पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए मणिपुर की 14 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने अपनी बात रखी और देश की जनता से सवाल पूछा। उन्होंने लिखा:
“जब भारत को मेडल की ज़रूरत थी, तो मणिपुर ने मेडल दिलाए। लेकिन जब साढ़े तीन साल की हिंसा के बाद मणिपुर को शांति की ज़रूरत है, तो पूरा भारत खामोश है।”
‘तौलिया संस्कृति’ पर भी चर्चा में आई थीं लिसिप्रिया
बता दें कि लिसिप्रिया कंगुजम हाल ही में तब भी सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता ‘थलपति’ विजय से वीआईपी कल्चर को लेकर अपील की थी।
उन्होंने विजय से अपनी कुर्सी के पीछे इस्तेमाल होने वाले सफेद तौलिए को हटाने का आग्रह करते हुए पूछा था कि क्या भारत में अफसरों और नेताओं के बीच चली आ रही इस ‘तौलिया संस्कृति’ को खत्म किया जा सकता है? लिसिप्रिया की इस अपील के बाद थलपति विजय ने अपनी कुर्सी से सफेद तौलिया हटवा दिया था, जिसकी काफी तारीफ हुई थी।


