चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय (PU) में मंगलवार को बारिश के दौरान जलभराव के बीच करंट लगने से माइक्रोबायोलॉजी विभाग की शोध छात्रा (PhD स्कॉलर) ज्योति की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद कैंपस में भारी बवाल मच गया। गुस्साए छात्रों ने कुलपति (VC) कार्यालय का गेट तोड़ दिया और बिजली विभाग के दफ्तर में तालाबंदी कर कई घंटों तक प्रदर्शन किया। परिजनों ने भी शुरू में शव लेने से इनकार कर दिया था, हालांकि बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा मांगें मान लेने के बाद मामला शांत हुआ।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को 23 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा और ज्योति के भाई को विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी देने का फैसला किया है। ज्योति के मामा जितेंद्र ने देर शाम मीडिया को बताया कि प्रबंधन के साथ सभी मांगों पर सहमति बन गई है।
कैसे हुआ हादसा?
चंडीगढ़ में मंगलवार को हुई तेज बारिश के कारण कैंपस में कई जगहों पर पानी भर गया था। ज्योति हॉस्टल नंबर 8 से हॉस्टल नंबर 10 की ओर जा रही थी। जैसे ही वह फुटपाथ से आगे बढ़ी, पानी में फैले करंट की चपेट में आ गई और वहीं गिर पड़ी। हादसे के वक्त वह फोन पर अपनी मां से बात कर रही थी। उसे तुरंत सेक्टर-16 के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वैज्ञानिक बनने का सपना टूटा, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ज्योति पढ़ाई में बेहद होशियार थी और भविष्य में साइंटिस्ट बनना चाहती थी।
-
पारिवारिक पृष्ठभूमि: ज्योति के पिता रविंद्र पेशे से किसान हैं। परिवार में मां के अलावा एक भाई (पवन) और एक बहन हैं। भाई पवन फिलहाल गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत है।
-
शिक्षा: उसने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) से बीएससी और हिसार से एमएससी की पढ़ाई की थी। वह करीब दो महीने पहले ही अपने घर होकर लौटी थी।
कुलपति ने व्यक्त किया गहरा शोक
पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेनू विग ने छात्रा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन शोकाकुल परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है।


