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दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्ती से हरियाणा के वाहन मालिकों की बढ़ी परेशानी, 20 हजार रुपये तक का हो सकता है चालान

हरियाणा। दिल्ली में 1 नवंबर से पुराने और निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों के प्रवेश पर सख्ती का असर हरियाणा के वाहन मालिकों पर भी पड़ने लगा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हरियाणा के 14 जिले शामिल होने के कारण इन क्षेत्रों से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों से दिल्ली में प्रवेश करने पर 20 हजार रुपये तक का चालान किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

इस फैसले को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का समर्थन किया है, लेकिन जुर्माने की भारी राशि पर आपत्ति जताई है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त का कहना है कि प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन नियमों को अचानक सख्ती से लागू करने के बजाय आम लोगों को पहले जागरूक किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भारी जुर्माने से आम वाहन मालिकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ेगा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेक लोगों को नए नियमों की पूरी जानकारी नहीं है। ऐसे में चालान की कार्रवाई से पहले लोगों को नियमों और प्रतिबंधित वाहनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

हरियाणा के 14 जिलों पर पड़ेगा दिल्ली के नियमों का असर

दिल्ली-एनसीआर में लागू वाहन प्रतिबंधों का प्रभाव हरियाणा के लोगों पर इसलिए अधिक पड़ रहा है, क्योंकि प्रदेश के 14 जिले एनसीआर का हिस्सा हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर सहित इन जिलों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए दिल्ली का सफर करते हैं।

हरियाणा सरकार की ओर से समय-समय पर एनसीआर का दायरा कम करने और प्रदेश के कुछ जिलों को इससे बाहर करने की मांग उठाई जाती रही है। इस संबंध में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की 42वीं बैठक में भी एनसीआर की सीमा में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे। बैठक में हरियाणा के पांच जिलों को एनसीआर से बाहर करने के प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में इन क्षेत्रों के वाहन मालिकों को दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना होगा।

1 नवंबर से दिल्ली में पुराने वाहनों की जांच तेज

दिल्ली में 1 नवंबर से बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के निर्धारित श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर निगरानी और सख्ती बढ़ाई गई है। इसके लिए शहर के प्रवेश मार्गों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की मदद ली जा रही है। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करके उनके उत्सर्जन मानक से जुड़ी जानकारी की पहचान करने में मदद करते हैं।

प्रतिबंध के दायरे में बीएस-3 पेट्रोल कारें, बीएस-4 डीजल कारें और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले कुछ कमर्शियल वाहन शामिल हैं। नियमों का उल्लंघन कर दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रतिबंधित श्रेणी के वाहनों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हालांकि, इस व्यवस्था में कुछ वाहनों को छूट भी दी गई है। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के अलावा वैध दस्तावेजों के साथ आरसी में सीएनजी दर्ज होने वाले वाहनों को निर्धारित नियमों के अनुसार राहत दी गई है। दोपहिया वाहनों को भी इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।

पेट्रोल पंपों पर भी होगी पीयूसी प्रमाणपत्र की जांच

दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पेट्रोल पंपों पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। करीब 500 पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी (PUC) की वैधता ऑनलाइन जांची जा रही है।

निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से इनकार भी किया जा सकता है। ऐसे में दिल्ली जाने की योजना बना रहे हरियाणा के वाहन चालकों को पहले अपने वाहन के दस्तावेज जांच लेने चाहिए।

वाहन चालकों को सलाह दी जा रही है कि वे वाहन पोर्टल पर पीयूसी प्रमाणपत्र की वैधता जांचें। इसके साथ ही वाहन की आरसी, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपडेट रखें, ताकि दिल्ली में प्रवेश के दौरान किसी तरह की परेशानी या जुर्माने का सामना न करना पड़े।

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