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“बच्चों की फोटो खींचना बर्दाश्त नहीं”: पैपराजी कल्चर पर फूटा प्रीति जिंटा का गुस्सा

Entertainment Desk: बॉलीवुड अभिनेत्री और आईपीएल टीम पंजाब किंग्स की मालकिन प्रीति जिंटा इन दिनों न सिर्फ अपनी टीम की जीत, बल्कि अपनी निजी जिंदगी और बेबाक बयानों को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद, एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर एक ‘इंटरैक्टिव सेशन’ रखा, जहाँ उन्होंने पैपराजी कल्चर (Paparazzi Culture) और अपनी प्राइवेसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। प्रीति जिंटा ने 27 अप्रैल को फैंस के साथ बातचीत के दौरान शोहरत और प्राइवेसी के बीच के संतुलन पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनके जीवन में कुछ चीजें ‘नॉन-नेगोशिएबल’ (जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता) हैं।

पैप्स की हरकतों से परेशान हैं एक्ट्रेस

सेशन के दौरान जब एक फैन ने उनसे पूछा कि शोहरत के बदले उन्हें क्या कुर्बान करना पड़ा, तो प्रीति ने कहा:

“मैं अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत गंभीर हूँ। मुझे फैंस से मिलना और फोटो खिंचवाना पसंद है, लेकिन एक सीमा (Boundary) होना जरूरी है। मुझे सबसे ज्यादा बुरा तब लगता है जब लोग बिना पूछे फोटो खींचते हैं।”

प्रीति जिंटा की नाराजगी के मुख्य बिंदु:

  • बच्चों की प्राइवेसी: प्रीति ने सख्त लहजे में कहा कि उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है कि कोई उनके बच्चों की तस्वीरें खींचे। उन्होंने इसे अपनी रेड लाइन बताया है।

  • पीछा करना है डरावना: एक्ट्रेस ने बताया कि पैपराजी का अचानक सामने कूद पड़ना या पीछा करना कभी-कभी डरावना और असुरक्षित महसूस कराता है।

  • दिखावे की राजनीति से दूरी: प्रीति ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं जानती हूँ कि आज के कई एक्टर्स खुद पैपराजी को बुलाते हैं ताकि वे खबरों में बने रहें। मैं उनकी जरूरत समझती हूँ, लेकिन मेरा तरीका अलग है। यह सब मुझे बेचैन कर देता है।”

  • कहाँ फोटो खींचना गलत?: उन्होंने स्पष्ट किया कि इवेंट्स पर पैप्स अपना काम करते हैं जो ठीक है, लेकिन जिम के बाहर या घर के पास छिपकर फोटो खींचना मर्यादा लांघने जैसा है।

मंदिर दर्शन और आईपीएल का खुमार

प्राइवेसी पर बात करने के साथ ही प्रीति इन दिनों काफी सुकून में भी नजर आईं। अपनी टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने दिल्ली के प्राचीन हनुमान मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण इंसान की तरह शांति से जीना चाहती हैं और उम्मीद करती हैं कि लोग उनकी इस जरूरत का सम्मान करेंगे।

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