मोहाली। पंजाबी इंफ्लूएंसर मंजीत कौर की मौत के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने उसकी मां कांता देवी के बयान पर अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज किया है। वहीं, इस पूरे प्रकरण में खरड़ सदर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने न तो हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया और न ही अस्पताल में भर्ती मंजीत कौर के होश में आने के बाद उसके बयान दर्ज किए।
जानकारी के मुताबिक, मंजीत कौर का पीजीआई में इलाज चल रहा था। उसने पुलिस को बुलाकर अपने बयान दर्ज कराने की इच्छा जताई थी। पीजीआई चौकी की ओर से खरड़ सदर थाना पुलिस को भी सूचना दी गई थी कि मंजीत कौर को होश आ गया है और उसके बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में जांच अधिकारी एएसआई लखविंदर सिंह को फोन के जरिए सूचना दी गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह मंजीत कौर के बयान दर्ज करने के लिए अस्पताल नहीं पहुंचे। पीजीआई चौकी में इस संबंध में डीडीआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
मां ने लगाए गंभीर आरोप
मंजीत कौर की मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसकी मां कांता देवी के बयान पर मामला दर्ज किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंजीत कौर को दो जानकारों ने सेक्टर-34 स्थित शराब के ठेके के पास बुलाया था। इसके बाद कथित तौर पर उसका अपहरण कर उसे मोरिंडा ले जाया गया।
मृतका की मां के आरोप के मुताबिक, आरोपियों ने मंजीत कौर को एक पेड़ से बांध दिया और उसे आग लगा दी। घटना के बाद उसकी हालत गंभीर बनी रही और वह लंबे समय तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही।
5 अगस्त को आया था होश, फिर भी नहीं हुए बयान
बताया गया है कि घटना 3 जुलाई की देर रात की है। मंजीत कौर को 9 जुलाई को पीजीआई में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 5 अगस्त को उसे होश आया, जिसके बाद उसके बयान दर्ज किए जाने की उम्मीद थी। हालांकि, आरोप है कि खरड़ सदर थाना पुलिस की ओर से उस समय भी उसके बयान दर्ज नहीं किए गए।
करीब दो महीने तक गंभीर हालत में रहने के बाद 26 अगस्त को इलाज के दौरान मंजीत कौर की मौत हो गई। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसकी मां की शिकायत के आधार पर अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस आरोपों की जांच कर रही है। मंजीत कौर के अपहरण, आग लगाने और इस मामले में पुलिस की कथित लापरवाही से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


