चंडीगढ़। लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। कर्मचारियों के इस फैसले से पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न सरकारी विभागों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
दूसरी ओर, सरकार ने भी आंदोलन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार की ओर से ‘नो वर्क नो पे’ यानी काम नहीं तो वेतन नहीं का आदेश जारी किया गया है। साथ ही ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपस्थिति दर्ज कराने के बाद कार्यालय से गायब रहने पर भी कार्रवाई
सरकारी आदेश में कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। इससे सरकारी कामकाज प्रभावित होने के साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारियों की अनुपस्थिति को अनधिकृत माना जाएगा और उस अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा। इससे पहले कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार करीब 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर चुकी है।
इन मांगों को लेकर आंदोलन
कर्मचारी संगठन लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लंबित महंगाई भत्ता (DA) और एरियर जारी करना, पुरानी पेंशन योजना लागू करना, अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करना शामिल है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। वहीं सरकार के सख्त आदेश के बाद आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।


