चंडीगढ़: हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं, विशेषकर उद्योगपतियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बिजली आपूर्ति से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए अनधिकृत लोड पर लगने वाले पेनल्टी सरचार्ज को काफी व्यावहारिक और सरल बना दिया है। इसके अलावा, स्वीकृत (Sancatined) बिजली लोड को कम कराने और उसे बाद में दोबारा बहाल (Restore) कराने की प्रक्रिया को भी पहले से बेहद आसान कर दिया गया है। ये नए नियम राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होने के साथ ही पूरे प्रदेश में लागू हो गए हैं।
. अनधिकृत लोड और सरचार्ज के नए नियम (10% तक कोई पेनल्टी नहीं)
आयोग द्वारा जारी नए प्रावधानों के अनुसार:
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10% तक छूट: अब उपभोक्ता अपनी स्वीकृत ‘कॉन्ट्रैक्ट डिमांड’ से 10 प्रतिशत तक अधिक बिजली का इस्तेमाल बिना किसी अतिरिक्त पेनल्टी या सरचार्ज के कर सकेंगे। (पुराने नियम के तहत महज 5% से अधिक लोड होने पर ही पूरे बिल पर 25% का भारी सरचार्ज ठोक दिया जाता था।)
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110% से 115% तक लोड: यदि बिजली की खपत स्वीकृत लोड से 110% से 115% के बीच रहती है, तो कुल बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत सरचार्ज लगेगा।
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115% से अधिक लोड: यदि खपत 115% से भी अधिक पाई जाती है, तो पहले की तरह 25 प्रतिशत सरचार्ज लागू रहेगा।
आयोग का मानना है कि इस छूट से उद्योगों और व्यावसायिक इकाइयों को उत्पादन के दौरान अचानक बढ़ने वाली बिजली की मांग को बिना किसी भारी जुर्माने के पूरा करने में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
. बिजली लोड घटाना हुआ सस्ता (अधिकतम ₹20,000 प्रोसेसिंग फीस)
एचईआरसी (HERC) ने बिजली लोड कम कराने और उसे पुनः बहाल कराने की प्रक्रिया में भी ढील दी है:
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यदि उपभोक्ता बिना अपना ‘वोल्टेज लेवल’ बदले अपना बिजली लोड कम कराता है, तो उसे केवल निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये तय की गई है।
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यदि लोड कम कराने के दौरान वोल्टेज लेवल में बदलाव होता है, तो सेवा कनेक्शन शुल्क (Service Connection Charges) संशोधित लोड के हिसाब से लिया जाएगा।
. 3 साल के भीतर बिना नए शुल्क के बहाल होगा पुराना लोड
नए नियमों के तहत उपभोक्ताओं को अपना पुराना स्वीकृत लोड वापस पाने का भी बेहतरीन अवसर दिया गया है:
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उपभोक्ता 3 साल के भीतर बिना कोई नया सेवा कनेक्शन शुल्क दिए अपने पुराने स्वीकृत लोड को दोबारा बहाल (Restore) करा सकेंगे।
लोड घटाने और बहाल कराने की शर्तें:
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लॉक-इन पीरियड: लोड कम कराने या दोबारा बहाल कराने के बाद 6 महीने का लॉक-इन पीरियड रहेगा (यानी 6 महीने तक दोबारा बदलाव नहीं होगा)।
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सीमित अवसर: 3 साल की अवधि के दौरान केवल एक बार लोड कम कराने और एक बार बहाल कराने की सुविधा मिलेगी।
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बकायेदार नहीं होंगे पात्र: जिन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का पुराना बकाया है, या जिनके खिलाफ बिजली चोरी व अन्य कानूनी मामले लंबित हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।


