चंडीगढ़: हरियाणा में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस जहां पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रही है, वहीं भाजपा ने भी विपक्ष के पुराने शासनकाल की याद दिलाते हुए जोरदार जवाबी हमला किया है।
कांग्रेस का आरोप: युवाओं के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़
कांग्रेस पार्टी लगातार भाजपा सरकार पर निशाना साध रही है। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म हो गई है और बार-बार हो रहे पेपर लीक से युवाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कांग्रेस ने सरकार से इस मामले में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भाजपा का पलटवार: पहले अपने शासनकाल का हिसाब दे कांग्रेस
कांग्रेस के इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने इसे महज राजनीतिक हथकंडा करार दिया है। भाजपा का कहना है कि:
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जो नेता अपने शासनकाल में युवाओं को भ्रष्ट व्यवस्था और भाई-भतीजावाद का शिकार बनाते थे, वे आज उनके हितैषी बनने का नाटक कर रहे हैं।
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पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस को पहले अपनी सरकार में हुई भर्तियों और भ्रष्टाचार के आरोपों का हिसाब देना चाहिए।
PRT भर्ती को बताया ‘पारदर्शिता’ का सबसे बड़ा प्रमाण
भाजपा ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हुई पीआरटी (PRT – मेवात कैडर) भर्ती को अपनी सरकार की ईमानदार कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
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पार्टी ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत 1,456 युवाओं को ‘बिना खर्ची और बिना पर्ची’ के नौकरी मिली है।
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भाजपा ने दावा किया कि वर्तमान सरकार में किसी भी प्रकार की अनियमितता की कोई जगह नहीं है और युवाओं को रोजगार पूरी तरह से उनकी योग्यता और प्रतिभा के आधार पर मिल रहा है।
रोजगार बना राजनीति का मुख्य केंद्र
इस सियासी खींचतान ने प्रदेश में रोजगार के मुद्दे को पूरी तरह से केंद्र में ला दिया है। भाजपा ने अपने बयानों के जरिए कांग्रेस के ‘पुराने शासन की भ्रष्ट व्यवस्था’ और अपनी ‘वर्तमान सुशासन व पारदर्शी नीति’ के बीच एक स्पष्ट लकीर खींचने का प्रयास किया है। अब देखना यह है कि युवाओं से जुड़ा यह मुद्दा आगामी राजनीति में क्या नया मोड़ लेता है।


