HARYANA DESK : अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी, वित्तीय अनियमितताओं और गबन का मामला अब देश की संसद में गूंज उठा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस गंभीर मुद्दे पर राज्यसभा के सभी निर्धारित कामकाज को रोककर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
आस्था की आड़ में ‘चोरी और लूट’ का आरोप
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपने नोटिस में इस पूरे मामले को करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है:
जमीन खरीद और 40% कमीशन: सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों में भारी अनियमितताएं हुई हैं और मंदिर निर्माण कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं।
गायब हुईं चांदी की ईंटें और रामचरितमानस: उन्होंने विशेष रूप से सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई 200 से अधिक चांदी की ईंटों और एक श्रद्धालु परिवार द्वारा अपने आभूषण पिघलाकर दान की गई कीमती रामचरितमानस के कथित रूप से गायब होने का मुद्दा उठाया।
बड़ी मछलियों को बचाने का आरोप: कांग्रेस सांसद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस पूरे घोटाले में कुछ ‘छोटी मछलियों’ (छोटे कर्मचारियों) को आगे कर पर्दे के पीछे बैठे बड़े चेहरों को बचाने का खेल चल रहा है।
जांच और FIR की सुस्त रफ्तार पर उठाए सवाल
सुरजेवाला ने मामले की निष्पक्ष जांच न होने और कानूनी कार्रवाई में ढिलाई बरतने को लेकर सरकार पर कई सवाल दागे:
उन्होंने कहा कि 2021 में भी गबन के कई तथ्य सामने आए थे और जांच शुरू की गई थी, लेकिन आज तक उसका कोई नतीजा नहीं निकला।
कथित गबन के मामलों में काफी देरी से एसआईटी (SIT) बनाई गई और बाद में जो एफआईआर (FIR) दर्ज हुई, उसमें केवल निचले स्तर के लोगों को नामजद किया गया।
सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक न तो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया गया और न ही ट्रस्ट के मुख्य सदस्यों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई।
‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना था ट्रस्ट, इसलिए सरकार दे जवाब’
अपने नोटिस में कांग्रेस सांसद ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की सीधी जवाबदेही तय करने की मांग की:
“9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार ने इस ट्रस्ट का गठन किया था। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने मंदिर के लिए हजारों करोड़ रुपये का दान दिया है। चूंकि ट्रस्ट का गठन सरकार ने अदालत के आदेश पर किया था, इसलिए इस कथित भ्रष्टाचार पर सरकार और ट्रस्ट दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी व जवाबदेही तय होनी चाहिए।”


