चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में निवेश और कारोबार को सुगम बनाने के लिए अनुपालन में कमी (Compliance Reduction) और विनियमन-सरलीकरण (De-regulation) अभियान के तहत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्राथमिकता वाले 28 में से 21 बड़े सुधारों को हरी झंडी दे दी है। इस पहल के साथ हरियाणा केंद्र सरकार के इस विशेष अभियान में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को बचे हुए सुधारों को समय सीमा के भीतर लागू करने और सभी साक्ष्य एमआईएस (MIS) पोर्टल पर अपलोड करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सुधार और नए प्रावधान:
1. केंद्र द्वारा स्वीकृत 6 मुख्य सुधार
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बिजली कनेक्शन: प्रक्रिया को और अधिक सरल व तेज बनाना।
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दुकानें व प्रतिष्ठान: व्यावसायिक नियमों में उदारीकरण।
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सिंगल विंडो सिस्टम: सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और राइट टू सर्विस में ऑटो-अपील प्रणाली।
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पर्यावरण व एमएसएमई: पर्यावरणीय स्वीकृतियों का सरलीकरण और एमएसएमई (MSME) के लिए निरीक्षण प्रक्रियाओं तक आसान पहुंच।
2. ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल, 2026’ का ड्राफ्ट तैयार
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उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा तैयार इस प्रस्तावित विधेयक के तहत पात्र एमएसएमई इकाइयों को स्व-घोषणा (Self-declaration) के आधार पर इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलेगा।
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नई इकाइयों को सरकारी विभागों के निरीक्षण (Inspection) से 3 साल तक की छूट का प्रावधान किया गया है।
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HEPC राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी होगी, जबकि जिला स्तरीय समितियां सिंगल विंडो के जरिए समयबद्ध मंजूरी देंगी।
3. औद्योगिक प्लॉट्स के लिए HSIDC की बड़ी राहतें
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औद्योगिक भूखंडों के विभाजन और एकीकरण (Sub-division & Amalgamation) की सुविधा।
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पूर्व अनुमति के बिना परियोजनाओं में बदलाव की अनुमति।
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10 वर्ष बाद लीजहोल्ड प्लॉटों को फ्रीहोल्ड में बदलने की व्यवस्था।
4. 70% क्षेत्र में CLU की आवश्यकता खत्म
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नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अनुसार, राज्य के 70% गैर-नियंत्रित क्षेत्रों में कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए CLU (Change of Land Use) की जरूरत नहीं है।
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नियंत्रित क्षेत्रों में भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के सिस्टम-जनरेटेड ऑटोमैटिक CLU स्वीकृति पर काम जारी


