चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 जुलाई को जींद में होने वाली महा-जनसभा से पहले हांसी के चनैत गांव में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पिछले दो महीनों से पीने के पानी की किल्लत को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीणों को मंगलवार देर रात हांसी सदर थाना पुलिस ने नोटिस थमाए हैं। इस नोटिस में चेतावनी दी गई है कि पीएम की रैली के दौरान किसी भी तरह की अराजकता या कानून-व्यवस्था भंग करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
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मूल समस्या: चनैत गांव के लोग लंबे समय से पीने के पानी के संकट से जूझ रहे हैं। वे पाइपलाइन के जरिए टी (T) से जलापूर्ति शुरू करने की मांग को लेकर पिछले दो महीने से धरने पर हैं।
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ग्रामीणों का अल्टीमेटम: प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने 14 जुलाई तक का समय दिया था। मांग पूरी न होने पर उन्होंने ऐलान किया था कि 17 जुलाई को वे जींद रैली में जाकर सीधे प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखेंगे।
पुलिस एक्शन और ग्रामीणों का रुख
ग्रामीणों के इस बड़े ऐलान के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। मंगलवार देर रात पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर धरने का नेतृत्व कर रहे प्रमुख लोगों सहित दर्जनों ग्रामीणों को नोटिस थमाए और शांति व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी।
ग्रामीणों का पक्ष: ग्रामीणों ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि वे इसका कानूनी जवाब देंगे। उन्होंने साफ किया, “हम प्रधानमंत्री की रैली में जरूर जाएंगे, लेकिन हमारा इरादा अशांति फैलाने का नहीं है। हम पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए अपनी आवाज उठाएंगे।”
अब सबकी नजरें 17 जुलाई पर
पानी की मांग को लेकर शुरू हुआ यह स्थानीय आंदोलन अब प्रधानमंत्री की रैली से जुड़ने के कारण पूरे हरियाणा में चर्चा का विषय बन गया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि:
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क्या चनैत गांव के ग्रामीण प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचा पाएंगे?
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क्या रैली के मंच से गांव की पेयजल समस्या के समाधान की कोई बड़ी घोषणा होगी?
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रैली के दिन आंदोलनकारियों को लेकर प्रशासन का क्या रुख रहता है?
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