पंजाब। शिरोमणि अकाली दल (रीसर्जेंट), इंटरनेशनल पंथक दल, यूनाइटेड अकाली दल, बेगमपुरा खालसा राज पार्टी और पंथक आज़ाद ग्रुप समेत कई प्रमुख सिख प्रतिनिधि संगठनों ने एक संयुक्त पहल की है। इन संगठनों ने 1980 से 1995 के डेढ़ दशक के दौरान पंजाब में हुए घटनाक्रमों और पंजाबियों, विशेषकर सिख समुदाय द्वारा झेली गई कथित प्रताड़ना के मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
जसवंत सिंह खालरा के प्रयासों और फिल्म पर रोक का हवाला
संगठनों ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में मारे गए लोगों के आंकड़े जुटाए थे।
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सुप्रीम कोर्ट का रुख: संगठनों के अनुसार, जसवंत सिंह खालरा द्वारा जुटाए गए सबूतों को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना था, जिसके आधार पर करीब दो हजार प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया गया।
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फिल्म पर प्रतिबंध का विरोध: ज्ञापन में कहा गया है कि इन्हीं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित एक फिल्म पर बिना किसी ठोस कारण के प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
वर्तमान सरकार से न्याय की उम्मीद
सिख संगठनों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और सिखों के प्रति मौजूदा सरकार के सकारात्मक रवैये को देखते हुए उन्हें न्याय की आस जगी है। संगठनों के अनुसार, अब दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने का सही समय आ गया है।
तीन प्रमुख मांगें: सिख समुदाय की आहत भावनाओं पर मरहम लगाने और न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संगठनों ने सरकार के समक्ष तुरंत तीन मांगें स्वीकार करने का पुरजोर अनुरोध किया है।
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