हरियाणा कांग्रेस में हलचल तेज: नए प्रभारी संजय दत्त से मिले दिग्गज, क्या 2029 में खत्म होगा 15 साल का वनवास?

Haryana

चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस के भीतर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में प्रदेश प्रभारी संजय दत्त से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का दौर शुरू हो चुका है। इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या कांग्रेस अब रक्षात्मक रुख छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सीधी और आक्रामक चुनौती देने की रणनीति बना रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नए प्रभारी संजय दत्त, हरियाणा में कांग्रेस के करीब 15 साल लंबे सत्ता के वनवास को साल 2029 के आगामी विधानसभा चुनाव में समाप्त करा पाएंगे।

दिल्ली दरबार में वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा

हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने दिल्ली पहुंचकर प्रदेश प्रभारी संजय दत्त से अकेले में लंबी मुलाकात की। इस बैठक के दौरान राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की जमीनी मजबूती और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

राव नरेंद्र सिंह के अलावा हरियाणा कांग्रेस के कई अन्य दिग्गज नेताओं ने भी अलग-अलग समय पर संजय दत्त से मुलाकात की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • चौधरी बीरेंद्र सिंह

  • कैप्टन अजय सिंह यादव

  • धर्मपाल सिंह मलिक

  • राव दान सिंह

इन सभी वरिष्ठ नेताओं ने जमीनी हालात और संगठन के ढांचे को लेकर अपने-अपने सुझाव और फीडबैक प्रभारी के साथ साझा किए।

एकता, अनुशासन और प्रदर्शन पर रहेगा जोर

मुलाकातों के बाद प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार हरियाणा कांग्रेस को तीन मुख्य स्तंभों—एकता, अनुशासन और प्रदर्शन (Performance) के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही चंडीगढ़ में हरियाणा कांग्रेस की एक बड़ी और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी, जिसकी तारीख राज्य का नेतृत्व सभी वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद तय करेगा।

संजय दत्त के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां

  1. आंतरिक गुटबाजी को खत्म करना: कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी के भीतर सालों से चली आ रही गुटबाजी और अलग-अलग खेमों को एक मंच पर लाना है। जब तक सभी वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एकजुट नहीं होंगे, तब तक चुनावी मैदान में मजबूती से उतरना मुश्किल होगा।

  2. मजबूत भाजपा से मुकाबला: लगातार सत्ता पर काबिज भाजपा जैसी कैडर-बेस्ड पार्टी से लोहा लेने के लिए कांग्रेस को सिर्फ बैठकों तक सीमित न रहकर बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ानी होगी।

निष्कर्ष: दिल्ली में शुरू हुआ मुलाकातों का यह दौर हरियाणा कांग्रेस के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह कवायद केवल बंद कमरों की बैठकों तक ही सीमित रहती है या फिर इसका कोई ठोस असर जमीन पर भी दिखाई देता है। यदि कांग्रेस गुटबाजी पर काबू पा लेती है, तो 2029 का चुनाव हरियाणा की सियासत में बड़ा उलटफेर कर सकता है।

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