नई दिल्ली: फुटबॉल इतिहास में आज का दिन पराग्वे के नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। 120 मिनट के कड़े संघर्ष और फिर साँसें रोक देने वाले पेनल्टी शूटआउट में पराग्वे ने चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी को 4-3 से हराकर पूरे फुटबॉल जगत को स्तब्ध कर दिया। निर्धारित और अतिरिक्त समय तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं। इस हार के साथ ही जर्मनी के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड जुड़ गया है—वर्ल्ड कप इतिहास में यह पहला मौका है जब जर्मन टीम को पेनल्टी शूटआउट में शिकस्त का सामना करना पड़ा है।
चोटिल एनसिसो का कमाल, पराग्वे को दिलाई बढ़त
मैच के शुरुआती हाफ में जर्मनी ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में दबदबा बनाने की कोशिश की, लेकिन पराग्वे के मजबूत इरादों ने उन्हें रोक कर रखा।
-
एनसिसो का जादुई हेडर: वॉर्म-अप मैच में गंभीर रूप से चोटिल होने वाले पराग्वे के 22 वर्षीय युवा फॉरवर्ड जूलियो एनसिसो ने अपनी चोट की परवाह न करते हुए मैदान संभाला।
-
मैच के 42वें मिनट में मथियास गैलार्जा के एक शानदार क्रॉस पर एनसिसो ने सटीक टाइमिंग के साथ बेहतरीन हेडर लगाया और दिग्गज गोलकीपर मैनुअल नोएर को छकाते हुए गेंद को नेट में डाल दिया।
इस गोल की बदौलत पराग्वे ने 1-0 की अप्रत्याशित बढ़त हासिल की, हालांकि बाद में चोट बढ़ने के कारण एनसिसो को मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद जर्मनी ने जोरदार वापसी की और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
VAR रिव्यू ने छीना जर्मनी का गोल, पराग्वे को मिला जीवनदान
अतिरिक्त समय (Extra Time) के 102वें मिनट में मुकाबले में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला:
-
जर्मनी के जोनाथन टाह ने नथानिएल ब्राउन के कॉर्नर पर एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया।
-
जर्मन खेमा जीत के जश्न में डूब चुका था, लेकिन तभी रेफरी जलाल जायद ने VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) का सहारा लिया।
-
रिप्ले में साफ देखा गया कि गोल होने से ठीक पहले जर्मनी के वाल्डेमार एंटन ने छह गज के दायरे में पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल को फाउल किया था।
रेफरी ने इस गोल को खारिज कर दिया, जिससे पराग्वे को एक नया जीवनदान मिल गया। इसके बाद जर्मनी ने काई हाफर्ट्ज और लियोन गोरेट्ज़का के जरिए कई खतरनाक हमले किए, लेकिन पराग्वे के अभेद्य डिफेंस को भेद नहीं सके।
स्कोरकार्ड:
-
फुल टाइम स्कोर: पराग्वे 1 – 1 जर्मनी (एनसिसो 42′)
-
पेनल्टी शूटआउट: पराग्वे 4 – 3 जर्मनी
-
ऐतिहासिक फैक्ट: वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हारा।