चंडीगढ़: हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों से जुड़े 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई ने हरियाणा के निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सदस्य सचिव प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम अहमद डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा को भी हिरासत में लिया गया है।
सीबीआई ने सोमवार देर रात बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद मंगलवार को तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है।
169 करोड़ रुपये के गबन का मुख्य आरोप
सीबीआई की जांच के मुताबिक, एचएसपीसीबी (HSPCB) में पदस्थ रहने के दौरान प्रदीप कुमार ने विभाग की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी पूरी निवेश प्रक्रिया को खुद संभाला था। आरोप है कि उन्होंने तय सीमा से ज्यादा सरकारी पैसा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में ट्रांसफर कराया। हालांकि, वहां एफडी बनाने के बजाय फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 169 करोड़ रुपये का गबन कर लिया गया। प्रदीप कुमार लगातार पूछताछ से बच रहे थे, जिसके बाद सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया।
फर्जी खातों और मोबाइल नंबरों से हेराफेरी
जांच में सामने आया है कि बैंक अधिकारियों ने सरकारी विभागों के नाम पर खाते खोलते समय केवाईसी (KYC) और अन्य जरूरी नियमों को ताक पर रख दिया।
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खातों में विभागीय अधिकारियों के बजाय आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज किए गए, ताकि करोड़ों रुपये के लेन-देन के अलर्ट सीधे उनके पास जाएं।
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अकेले एचएसपीसीबी के खाते से करीब 187.26 करोड़ रुपये के 47 डेबिट अलर्ट एक ऐसे मोबाइल नंबर पर भेजे गए, जो विभाग का नहीं बल्कि सह-आरोपी का था।
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आरोपी बैंक मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा पर फर्जी चेक के आधार पर करोड़ों के लेन-देन को मंजूरी देने का आरोप है, जिसमें पंचायत विभाग के खाते से 47.51 करोड़ रुपये की अवैध निकासी भी शामिल है।
अब तक 22 गिरफ्तार; डिजिटल सबूतों की जांच जारी
657 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले में सीबीआई अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और 17 के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। गिरफ्तार लोगों में शामिल हैं:
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3 आईएएस (IAS) अधिकारी
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1 आईएफएस (IFS) अधिकारी
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8 बैंक अधिकारी व कर्मचारी
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4 सरकारी कर्मचारी और 6 निजी व्यक्ति
सीबीआई अब आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन का रास्ता) की जांच कर रही है। आरोपियों पर कुछ डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप है।
इतिहास में पहली बार: रिटायरमेंट के दिन ही सलाखों के पीछे पहुंचे IAS
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी हुई, ठीक उसी दिन वह अपनी सेवा से सेवानिवृत्त (Retire) भी हो रहे थे। हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में यह पहला मामला है जब कोई आईएएस अधिकारी निलंबन (Suspension) की स्थिति में ही रिटायर हुआ है।
रिटायरमेंट लाभों पर रोक: सरकारी नियमों के तहत, निलंबन के दौरान सेवानिवृत्त होने के कारण प्रदीप कुमार को जांच पूरी होने तक केवल अस्थायी पेंशन ही मिलेगी। उनकी ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और अन्य फंड्स पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। दोष सिद्ध होने पर इन लाभों को हमेशा के लिए बंद भी किया जा सकता है।