Punjab Desk। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने तख्त श्री हजूर साहिब में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि गुरु घर सभी के लिए खुले हैं और यहां हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के माथा टेकने का अधिकार है। ऐसे पवित्र स्थान पर इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि सिख इतिहास और परंपरा में गुरु घरों में किसी के साथ जात-पात या किसी अन्य आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं है। सिख धर्म हमेशा मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देता रहा है। उन्होंने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब में हुई घटना सिखी के मूल सिद्धांतों और सिख मर्यादा के विपरीत है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की।
धामी ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन गुरु साहिब उनके अंग-संग हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह हिम्मत के साथ इस मुश्किल दौर से बाहर निकलेंगे।
वहीं, एसजीपीसी अध्यक्ष ने बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर चलाए जा रहे संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि 15 तारीख को मोहाली से गवर्नर हाउस की ओर निकाले जाने वाले मार्च को उनका पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी लंबे समय से बंदी सिंहों की रिहाई के लिए सरकारों के समक्ष आवाज उठाती रही है और इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे संगठनों को भी समय-समय पर समर्थन दिया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा किसी एक संगठन या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसाफ और मानवीय अधिकारों से जुड़ा विषय है। जो लोग अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उनकी रिहाई के लिए सरकारों को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
बंदी सिंहों के परिवारों की पीड़ा का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि वृद्ध माताएं अपने बेटों से मिलने के लिए वर्षों से इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन की पैरोल पर्याप्त नहीं है। परिवारों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि बंदी सिंह अपने परिजनों से मिल सकें और अपनी वृद्ध माताओं की देखभाल कर सकें।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए उठने वाली हर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आवाज का एसजीपीसी समर्थन करती रहेगी। उन्होंने सरकारों से इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए उचित और सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है।


