हरियाणा कांग्रेस ने निगम चुनाव के लिए बनाई 3 कमेटी, सेल्जा-सुरजेवाला-बीरेंद्र को किया बाहर!

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नमस्कार दोस्तों, आपका स्वागत है हमारे चैनल MSTV India पर जहां हम राजनीति को मसालेदार बनाते हैं! आज का टॉपिक: हरियाणा के तीन बड़े नगर निगमों – अंबाला, पंचकूला और सोनीपत – के फरवरी में होने वाले चुनाव। ये चुनाव सिर्फ सीटों का खेल नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के अंदर की जंग का मैदान बन चुके हैं! आज की वीडियो में हम बात करने वाले हैं भूपेंद्र हुड्डा के उस मास्टरस्ट्रोक की, जो चुनाव से ठीक पहले सबको चौंका रहा है!

कांग्रेस ने निगम चुनाव के लिए बनाई 3 कमेटी

सोचिए, चुनाव से पहले कांग्रेस ने जिला स्तरीय विशेष चुनाव समितियां बना लीं, लेकिन इसमें कुछ बड़े नाम गायब हैं। क्या ये पार्टी की एकता का सबूत है या फूट की शुरुआत? चलिए डिटेल में जाते हैं!तो दोस्तों, कांग्रेस ने इन तीनों नगर निगमों के लिए स्पेशल इलेक्शन कमेटियां गठित कर दी हैं। हर कमेटी में शामिल हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा। लेकिन मसाला यहां से शुरू होता है।कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को इन कमेटियों से बाहर रखा गया है!

सैलजा जी, जो दलित वोट बैंक की मजबूत नेत्री हैं, सुरजेवाला जी जो सोनिया-राहुल के करीबी हैं, और बीरेंद्र सिंह जो जाट राजनीति के दिग्गज – इन सबको साइडलाइन कर दिया? ये तो वैसा ही है जैसे टीम इंडिया में विराट, रोहित को बेंच पर बिठा दो और कहो “चलो मैच जीतते हैं!

हुड्डा करेंगे बीजेपी का फायदा

अब सवाल ये है – क्यों? क्या ये हुड्डा गुट की साजिश है? हरियाणा कांग्रेस में तो सालों से फूट चल रही है – हुड्डा vs सैलजा-सुरजेवाला। याद है 2019 के चुनाव? तब भी पार्टी की अंदरूनी लड़ाई ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया। अब फरवरी के इन नगर निगम चुनावों में अगर कांग्रेस एकजुट नहीं रही, तो बीजेपी फिर से क्लीन स्वीप कर सकती है! अंबाला, पंचकूला, सोनीपत – ये इलाके जाट बहुल हैं, लेकिन दलित और अन्य वोटर्स भी निर्णायक हैं। सैलजा जी को बाहर रखकर क्या कांग्रेस अपना ही गोल कर रही है? सूत्रों के मुताबिक, ये फैसला दिल्ली हाईकमान का है, लेकिन हुड्डा की सलाह पर। सुरजेवाला जी तो राष्ट्रीय स्तर पर बिजी हैं, लेकिन लोकल चुनाव में उनकी अनुपस्थिति से क्या संदेश जा रहा है? और बीरेंद्र सिंह? वो तो हाल ही में बीजेपी से कांग्रेस में आए थे, अब उन्हें साइडलाइन? क्या पार्टी में नए आए लोगों को जगह नहीं मिल रही? दोस्तों, ये राजनीति का असली खेल है – जहां कुर्सी के लिए दोस्त दुश्मन बन जाते हैं!

क्या ये चुनाव कांग्रेस की वापसी का मौका है या फिर हार की तैयारी? बीजेपी तो पहले से ही मजबूत है – नायब सैनी सरकार के कामों पर वोट मांग रही है। लेकिन अगर कांग्रेस की ये कमेटियां कामयाब रहीं, तो हुड्डा साहब हीरो बन सकते हैं। वरना, सैलजा-सुरजेवाला गुट बगावत कर सकता है! क्या कहते हो तुम? कमेंट में बताओ – कांग्रेस जीतेगी या बीजेपी का राज कायम रहेगा?

अब थोड़ा फैक्ट चेक: ये चुनाव फरवरी में हैं, वोटर लिस्ट तैयार हो रही है, वार्ड रिजर्वेशन हो चुका है। कांग्रेस की रणनीति है ग्रासरूट लेवल पर काम करना, लेकिन बिना बड़े नेताओं के क्या होगा? दोस्तों, ये सिर्फ नगर निगम नहीं, 2029 के विधानसभा चुनावों की रिहर्सल है!

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