नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपके अपने चैनल MSTV India पर! आज हम बात करने वाले हैं हरियाणा के फरीदाबाद में हुए उस सियासी ड्रामे की, जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया! फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी को मिली बंपर जीत, लेकिन सीनियर डिप्टी मेयर के नाम पर मचा ऐसा बवाल कि चुनाव ही टल गया! आखिर क्या है इस सियासी तूफान की असली वजह? अजय बैसला के नाम पर क्यों भड़के बीजेपी के दो बड़े मंत्री? और क्या है इस कहानी के पीछे का वो राज, जो हर कोई जानना चाहता है? चलिए, शुरू करते हैं!
क्या है मामला?
दोस्तों, फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 46 में से 39 सीटें जीतकर बाजी मार ली। मेयर की कुर्सी पर प्रवीण बत्रा ने कब्जा जमाया, लेकिन सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में ऐसा ट्विस्ट आया कि सब हैरान रह गए! 6 घंटे तक चली बैठकों के बाद भी बीजेपी के बड़े नेता आपस में सहमति नहीं बना पाए। और इसका केंद्र बिंदु बना एक नाम – अजय बैसला! आखिर ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी के दो गुट आमने-सामने आ गए? चलिए, इस कहानी को और गहराई से समझते हैं।
अजय बैसला विवाद की असली वजह
अब असली सियासी मसाला सुनिए! साल 2024 के विधानसभा चुनाव में राजेश नागर को बीजेपी ने टिकट दिया था। लेकिन उस समय अजय बैसला ने तिगांव में उनका जमकर विरोध किया था। सूत्रों की मानें, तो अजय ने बीजेपी में रहते हुए कांग्रेस उम्मीदवार की मदद की थी। और इसका कारण? कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे देवेंद्र के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने राजेश नागर को चुना। बस, यहीं से शुरू हुई सियासी दुश्मनी! और अब, जब अजय बैसला का नाम सीनियर डिप्टी मेयर के लिए आया, तो विपुल गोयल और राजेश नागर भड़क गए।
दोस्तों, ये गुटबाजी नई नहीं है। 7 साल पहले भी कृष्णपाल गुर्जर ने अपने बेटे देवेंद्र चौधरी को सीनियर डिप्टी मेयर बनवाया था, और मनमोहन गर्ग डिप्टी मेयर बने थे। लेकिन इस बार बहुमत होने के बावजूद, फूट साफ दिखी। BJP को निगम में एकतरफा पावर, लेकिन अंदर का ये ड्रामा शहर के विकास पर असर डालेगा? अब सोचिए, दोस्तों – जब बहुमत वाली पार्टी में ही एकता नहीं, तो जनता का क्या? ये गुटबाजी BJP के लिए खतरा बन सकती है। क्या कृष्णपाल गुट जीतेगा या विपुल गोयल वाला? चुनाव जल्द होंगे, लेकिन ये ड्रामा जारी रहेगा। आप क्या सोचते हैं – गुटबाजी राजनीति का हिस्सा है या नुकसानदेह? कमेंट जरूर करें!
