दोस्तों, हरियाणा की सियासत में एक बार फिर तहलका मच गया है! पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने उचाना विधानसभा चुनाव में अपनी हार का ऐसा खुलासा किया है, जो आपके होश उड़ा देगा! पर्दे के पीछे हुआ बड़ाखेल, तीन लोग आए एक साथ, और जाट वोटों का हुआ बंटवारा! क्या है ये सियासी साजिश? आखिर कौन थे वो तीन लोग? और क्या बृजेंद्र की हार के पीछे छिपा है कोई बड़ा राज?
उचाना की हार का राज
दोस्तों, अक्टूबर 2024 का हरियाणा विधानसभा चुनाव हरियाणा की सियासत में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था। और इस चुनाव में उचाना सीट की जंग ने सबको चौंका दिया। क्यों? क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को सिर्फ 32 वोटों से हार का सामना करना पड़ा! जी हां, 32 वोट! ये हरियाणा की सबसे टाइट फाइट थी। लेकिन बृजेंद्र का कहना है कि उनकी हार कोई साधारण हार नहीं थी। इसके पीछे थी एक सियासी साजिश! क्या थी वो साजिश? चलिए जानते हैं।
पर्दे के पीछे का खेल
बृजेंद्र सिंह ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलकर अपनी हार का राज खोला। उन्होंने कहा, ‘मुझे हराने के लिए पर्दे के पीछे बहुत बड़ा खेल हुआ। तीन लोग एक साथ आए।’ और इनमें से एक नाम था जेजेपी के दुष्यंत चौटाला का! दुष्यंत ने एक रैली में कहा था, ‘अगर कुछ न सूझे तो गिरड़े को दे देना।’ गिरड़ा यानी रोड रोलर, जो निर्दलीय उम्मीदवार बीरेंद्र घोघड़ियां का चुनाव निशान था। बृजेंद्र ने बिना नाम लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भी निशाना साधा और कहा कि दो निर्दलीय उम्मीदवारों की निष्ठा एक खास व्यक्ति के प्रति थी। कौन थे वो दोनिर्दलीय? बीरेंद्र घोघड़ियां और दिलबाग संडील! इन दोनों ने जाट वोटों को बांट दिया, जिसका फायदा उठाकर बीजेपी के देवेंद्र अत्री सिर्फ 32 वोटों से जीत गए। क्या ये सब पहले से तय था?
जाट वोटों का बंटवारा
उचाना की सीट पर जाट वोटों का बंटवारा इस हार की सबसे बड़ी वजह बना। बीजेपी ने गैर-जाट कार्ड खेलते हुए देवेंद्र अत्री को टिकट दिया, जबकि बृजेंद्र सिंह, बीरेंद्र घोघड़ियां, और दुष्यंत चौटाला जैसे जाट नेता मैदान में थे। नतीजा? जाट वोट बंट गए। बीरेंद्र घोघड़ियां को 31,456 वोट मिले, जो बृजेंद्र की हार का बड़ा कारण बने। क्या ये वोट बंटवारा एक सुनियोजित रणनीति थी?
बृजेंद्र ने अपनी हार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने 215 पोस्टल बैलेट्स की दोबारा गिनती की मांग की है, क्योंकि ये संख्या 32 वोटों के अंतर से कहीं ज्यादा है। अभी इस केस की सुनवाई चल रही है। क्या बृजेंद्र को इंसाफ मिलेगा? या ये सियासी जंग और गहराएगी? आप क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताएं!
