चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में पंजाबी भाषा के साइनबोर्ड और नेमप्लेट दोबारा लगाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाबी भाषा, संस्कृति और पहचान के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
मालविंदर कंग ने कुछ समय पहले पंजाब यूनिवर्सिटी के कैंपस में साइनबोर्ड और नेमप्लेटों से पंजाबी (गुरुमुखी) भाषा हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि यह कदम पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी भाषा की अनदेखी करने जैसा है।
इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कंग ने भारत के उपराष्ट्रपति एवं पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर सी.पी. राधाकृष्णन से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने आग्रह किया था कि विश्वविद्यालय में पंजाबी भाषा को उसका उचित स्थान और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
सांसद कंग ने जानकारी दी कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की ओर से आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें बताया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए पंजाबी साइनबोर्डों के लिए ऑर्डर भी जारी कर दिए हैं और इन्हें जल्द ही परिसर में स्थापित किया जाएगा।
इस निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए कंग ने कहा कि यह संदेश देता है कि पंजाब की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाबी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध विरासत, इतिहास और सामूहिक पहचान का प्रतीक है, जिसे हर स्तर पर सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए।
कंग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के चांसलर सी.पी. राधाकृष्णन का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी सराहना की, जिसने लोगों की भावनाओं को समझते हुए सुधारात्मक कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े सभी संस्थानों में पंजाबी भाषा को उसका उचित सम्मान, अधिकार और स्थान मिलना चाहिए। यह केवल भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरव से जुड़ा विषय है।