गुरुग्राम। हरियाणा में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है। गुरुग्राम और मानेसर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। मंगलवार को गुरुग्राम का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 305 दर्ज किया गया, जबकि मानेसर में यह आंकड़ा 309 तक पहुंच गया। महज एक दिन में प्रदूषण के स्तर में हुई इस तेज बढ़ोतरी ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। GRAP-2 लागू होने के बावजूद शहर की सड़कों पर धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।
एक दिन में तेजी से बढ़ा AQI, मानेसर की स्थिति भी चिंताजनक
प्रदूषण के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को गुरुग्राम का AQI 246 था, जो मंगलवार को बढ़कर 305 हो गया। इसी तरह मानेसर में भी वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई। यहां सोमवार को AQI 211 था, जो अगले ही दिन 98 अंकों की वृद्धि के साथ 309 पर पहुंच गया।
हवा की बिगड़ती गुणवत्ता का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
GRAP-2 के बावजूद प्रमुख सड़कों पर धूल का गुबार
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के नियम लागू हैं। इसके बावजूद गुरुग्राम की कई प्रमुख सड़कों पर धूल उड़ने की समस्या बनी हुई है।
उमंग भारद्वाज चौक से हीरो होंडा चौक और पटौदी रोड के कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही के कारण धूल का गुबार उठता दिखाई देता है। वहीं, द्वारका एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के किनारे मिट्टी के ढेर जमा हैं। सेक्टर-38, 39 और 40 सहित कई क्षेत्रों में सड़कों की खराब हालत भी धूल फैलने की बड़ी वजह बन रही है।
पानी के छिड़काव और मैकेनिकल सफाई पर उठे सवाल
सड़कों से धूल कम करने के लिए नियमित पानी का छिड़काव और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग बेहद जरूरी है। हालांकि, कई इलाकों में इन उपायों का प्रभावी तरीके से पालन होता नजर नहीं आ रहा है।
कुछ स्थानों पर मशीनों से सफाई करने के बजाय पारंपरिक झाड़ू से सड़कों की सफाई की जा रही है। इससे सड़क पर जमा महीन धूल दोबारा हवा में फैल जाती है। इसके अलावा प्रमुख मार्गों और व्यस्त चौराहों पर पानी के टैंकरों तथा एंटी स्मॉग गन की नियमित तैनाती भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
होटल और रेस्तरां में कोयले-लकड़ी के तंदूर से बढ़ रहा धुआं
शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे होटल और रेस्तरां में कोयले तथा लकड़ी से चलने वाले तंदूरों का इस्तेमाल भी एक संभावित कारण है। प्रतिबंधों के बावजूद कुछ जगहों पर इनका उपयोग जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे निकलने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा सकता है।
प्रदूषण रोकने के लिए जमीनी कार्रवाई जरूरी
गुरुग्राम और मानेसर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। सड़कों की नियमित मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और प्रतिबंधित ईंधन के इस्तेमाल पर सख्ती जरूरी है।
सिर्फ GRAP-2 के आदेश लागू करने से प्रदूषण की समस्या दूर नहीं होगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नियमित निगरानी के साथ जमीनी स्तर पर कार्रवाई करनी होगी, ताकि लोगों को जहरीली हवा से राहत मिल सके।


