महेंद्रगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने प्रोफेसर संगीत रागी द्वारा अहीर समाज को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि किसी पूरे समाज को ‘गंवार’ कहना जातिगत भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने संबंधित संस्थानों से मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रोफेसर संगीत रागी को अहीर समाज के इतिहास पर टिप्पणी करने से पहले रेजांग ला में शहीद हुए अहीर जवानों के अद्वितीय बलिदान के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अहीर समाज का इतिहास वीरता, शौर्य और त्याग की मिसाल रहा है। देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए इस समाज के अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।
उन्होंने कहा कि केवल माफी मांग लेने से जातिगत अपमान और भेदभाव की मानसिकता समाप्त नहीं हो जाती। सार्वजनिक मंचों पर किसी पूरे समाज को अपमानित करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वैचारिक मतभेद और बहस अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति को इसके नाम पर पूरे समुदाय का अपमान करने का अधिकार नहीं है।
बोले- पिछड़े समाजों के सम्मान से कोई समझौता नहीं
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या किसी समाज की सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर उसे अपमानित करना उचित है? उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। जाति के आधार पर किसी समुदाय को छोटा दिखाना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि अहीर समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और देश के प्रति योगदान को साबित करने के लिए किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। समाज के सम्मान के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों का विरोध जरूरी है। जातिगत भेदभाव के मामलों में केवल औपचारिक माफी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणियों पर भी उठाए सवाल
राव नरेंद्र सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री की कुछ कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और लीलाओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने भगवान श्रीराम को लेकर कथित तौर पर की गई ‘राम जी के पांच बाप थे’ टिप्पणी पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर सार्वजनिक मंचों से बोलते समय मर्यादा और जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी समाज, महापुरुष या धार्मिक आस्था से जुड़े विषय पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।


