Dharam ।। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व है। सामान्यतः लोग साल में दो नवरात्रियों (चैत्र और शारदीय) के बारे में जानते हैं, लेकिन साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं। इनमें से दो को ‘प्रकट’ और दो को ‘गुप्त’ कहा जाता है।
यहाँ गुप्त नवरात्रि से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है:
1. क्या है गुप्त नवरात्रि?
गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिकों और अघोरियों के लिए होती है। इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ ‘दस महाविद्याओं’ की कठिन साधना की जाती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें पूजा और अनुष्ठान को पूरी तरह ‘गुप्त’ रखा जाता है। माना जाता है कि साधना जितनी गुप्त होगी, फल उतना ही अधिक मिलेगा।
2. साल में कब-कब आती हैं?
साल में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है:
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माघ गुप्त नवरात्रि: यह माघ मास (जनवरी-फरवरी) के शुक्ल पक्ष में आती है।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: यह आषाढ़ मास (जून-जुलाई) के शुक्ल पक्ष में आती है।
विशेष नोट: वर्तमान कैलेंडर के अनुसार, 2026 की पहली गुप्त नवरात्रि (माघ मास) की शुरुआत 19 जनवरी 2026 से होने जा रही है।
3. गुप्त नवरात्रि का महत्व
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तंत्र-मंत्र की सिद्धि: यह समय तंत्र साधना, वशीकरण, और कठिन मंत्रों की सिद्धि के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
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मनोकामना पूर्ति: आम भक्त भी इस दौरान माँ की भक्ति कर अपनी जटिल समस्याओं (जैसे विवाह में देरी, शत्रु बाधा या गंभीर रोग) से मुक्ति पा सकते हैं।
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शक्ति का संचय: आध्यात्मिक उन्नति चाहने वाले लोग इस दौरान मौन व्रत और संयम का पालन कर अपनी आंतरिक शक्ति बढ़ाते हैं।
4. पूजा की जाने वाली दस महाविद्याएं
गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा के इन दस स्वरूपों की पूजा का विधान है:
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माँ काली
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माँ तारा
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माँ त्रिपुर सुंदरी
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माँ भुवनेश्वरी
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माँ छिन्नमस्ता
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माँ त्रिपुर भैरवी
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माँ धूमावती
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माँ बगलामुखी
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माँ मातंगी
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माँ कमला
5. पूजा के मुख्य नियम
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गोपनीयता: पूजा के बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को न बताएं।
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अखंड ज्योति: घर में माँ की अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है।
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सात्विकता: इन नौ दिनों में सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
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अर्धरात्रि पूजा: इसमें सुबह के साथ-साथ आधी रात (निशिता काल) की पूजा का बहुत अधिक महत्व है।
