नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर! अगर आप हरियाणा की सियासत के दीवाने हैं, तो ये वीडियो आपके लिए है। आज हम बात करेंगे हरियाणा कांग्रेस की उस सियासी जंग की, जहां परिवारवाद और सत्ता की भूख ने पार्टी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान अपने बेटों को सियासी आसमान पर चमकाने में जुटे हैं, लेकिन क्या ये ‘पुत्र प्रेम’ कांग्रेस को फिर से ले डूबेगा? आइए, आज इस स्क्रिप्ट में खोलते हैं हरियाणा की सियासत के वो राज, जो शायद आपको हैरान कर देंगे!” तो, तैयार हैं? चलिए शुरू करते हैं!
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पार्टी पर भारी पुत्रमोह
हरियाणा की राजनीति में भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक ऐसा नाम है, जिसे कोई अनदेखा नहीं कर सकता। दो बार मुख्यमंत्री, जाट समुदाय के बड़े नेता, और कांग्रेस का मजबूत चेहरा। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार ने कई सवाल खड़े किए। सवाल ये कि क्या हुड्डा और उनके करीबी उदयभान का अपने बेटों—दीपेंद्र हुड्डा और हर्षवर्धन भान—को सियासत में आगे बढ़ाने का जुनून कांग्रेस की हार की वजह बना? क्या ये सिर्फ संयोग है कि हरियाणा में कांग्रेस की हार के बाद भी हुड्डा और उदयभान अपने बेटों को सियासी वारिस बनाने में जुटे हैं? या फिर ये एक सोची-समझी रणनीति है? आइए, इस कहानी को और गहराई से समझते हैं!
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भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान की सियासत
2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठे। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि हुड्डा ने सिर्फ अपनी पसंद के उम्मीदवारों को बढ़ावा दिया, जिससे पार्टी में गुटबाजी बढ़ी और कई सीटों पर बागी उम्मीदवारों ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया।कांग्रेस के अंदरखाने से खबरें हैं कि हुड्डा ने दीपेंद्र को भविष्य का मुख्यमंत्री बनाने की स्क्रिप्ट लिख दी है, लेकिन इस चक्कर में पार्टी की एकता दांव पर लग गई!
अब बात करते हैं हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी उदयभान की। उदयभान, जो हुड्डा के करीबी माने जाते हैं, 2022 में कुमारी सैलजा को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष बने। उनके बेटे हर्षवर्धन भान को भी सियासत में लाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, उदयभान खुद 2019 और 2024 में होडल सीट से हार गए, लेकिन उनकी सियासी सक्रियता और हुड्डा के साथ गठजोड़ ने उन्हें पार्टी में मजबूत रखा है। लेकिन सवाल ये है—जब उदयभान अपनी सीट नहीं बचा पाए, तो क्या वो अपने बेटे को सियासत में स्थापित करने के लिए पार्टी के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं?
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क्या उदयभान का पुत्र मोह और हुड्डा का दीपेंद्र को आगे बढ़ाने का जुनून हरियाणा कांग्रेस को और कमजोर कर रहा है? या फिर ये हरियाणा की सियासत का वो सच है, जिसे कोई नहीं बदल सकता?तो दोस्तों, ये थी हरियाणा कांग्रेस की सियासी कहानी, जहां पुत्र मोह और सत्ता की जंग ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है।
