नमस्ते दोस्तों! स्वागत है आपके अपने चैनल MSTV India पर, जहां हम लाते हैं सबसे हॉट और हलचल भरी खबरें! हरियाणा की सियासत में तूफान मचा हुआ है! राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह की जंग अब मानेसर से निकलकर गुरुग्राम की गलियों तक पहुंच चुकी है! क्या मानेसर में मिली हार के बाद अब गुरुग्राम में भी राव इंद्रजीत को लगेगा जोरदार झटका?तो अंत तक बने रहिए, क्योंकि ये कहानी है पावर, प्रतिष्ठा और राजनीति की!
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मानेसर की हार इंद्रजीत के लिए खतरे की घंटी?
बात करते हैं मानेसर नगर निगम चुनाव की, जहां राव नरबीर ने राव इंद्रजीत को तगड़ा झटका दिया। मानेसर में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में नरबीर खेमे ने दोनों पदों पर कब्जा कर लिया, वो भी निर्विरोध! राव इंद्रजीत के समर्थक माने जाने वाली मेयर इंद्रजीत कौर और उनके 8 पार्षदों ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया।
कहा जाता है कि बीजेपी ने अपने पार्षदों को टूट से बचाने के लिए नेपाल भेज दिया था! ये सियासी चाल थी राव नरबीर की, जिसने इंद्रजीत के गढ़ में सेंध लगा दी। लेकिन सवाल ये है – क्या ये सिर्फ शुरुआत है? क्या अब गुरुग्राम में भी राव इंद्रजीत को ऐसा ही झटका लगने वाला है?
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गुरुग्राम में नया सियासी रण
दोस्तों, गुरुग्राम हरियाणा का वो शहर है जो न सिर्फ आर्थिक बल्कि सियासी तौर पर भी बेहद अहम है। और यहां राव नरबीर सिंह का प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, नरबीर ने अधिकारियों को खुली चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। उनकी सख्ती और विकास के लिए विजन ने उन्हें जनता के बीच ‘विकास पुरुष’ की छवि दी है।
वहीं, राव इंद्रजीत पर आरोप लग रहे हैं कि वो वोटों के आधार पर विकास में भेदभाव करते हैं। कांग्रेस नेता राज बब्बर ने हाल ही में कहा कि इंद्रजीत को सभी के लिए बराबर काम करना चाहिए, न कि सिर्फ अपने समर्थकों के लिए। क्या ये सियासी बयानबाजी गुरुग्राम में इंद्रजीत की पकड़ को कमजोर करेगी?
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क्या गुरुग्राम में बदलेगा सियासी समीकरण
तो दोस्तों, असली सवाल ये है – ये जंग है सत्ता की, प्रतिष्ठा की, या फिर अहीरवाल में वर्चस्व की? राव इंद्रजीत का अहीरवाल में दबदबा रहा है, लेकिन नरबीर की आक्रामक रणनीति और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता अब इंद्रजीत के लिए चुनौती बन रही है। मानेसर में हार के बाद क्या इंद्रजीत गुरुग्राम में अपनी साख बचा पाएंगे?
और बीजेपी के लिए भी ये आसान नहीं है। राव इंद्रजीत के समर्थकों और नरबीर के खेमे के बीच खींचतान पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। क्या बीजेपी इस सियासी जंग को संभाल पाएगी, या फिर कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा?
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“तो दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या राव नरबीर सिंह गुरुग्राम में भी राव इंद्रजीत को मात देंगे? या फिर इंद्रजीत अपनी सियासी ताकत से वापसी करेंगे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!
