SYL महाबैठक: अफसरों की सिफारिशों से सुलझेगा सालों पुराना विवाद, पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने मिलाया हाथ

Punjab

Punjab Desk: चंडीगढ़ में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिस्सा लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए दोनों नेताओं ने आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालने पर सहमति जताई है।

बैठक की मुख्य बातें: ‘भाईचारे’ की नई मिसाल

  • अफसरों की भूमिका: अब दोनों राज्यों के उच्च अधिकारी मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा करेंगे और अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। अधिकारी महीने में 3 से 4 बार बैठकें कर सकते हैं ताकि सिफारिशें जल्द तैयार हों।

  • मुख्यमंत्री नायब सैनी का बयान: सैनी ने कहा कि बातचीत बहुत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। जब नियत साफ हो, तो सार्थक परिणाम जरूर आते हैं।

  • मुख्यमंत्री भगवंत मान का रुख: मान ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा, “हम भाई कन्हैया जी के वारिस हैं, जिन्होंने युद्ध में दुश्मनों को भी पानी पिलाया था, हरियाणा तो हमारा छोटा भाई है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी का नेतृत्व इस पुराने विवाद को खत्म कर देगा।


क्या है SYL विवाद और वर्तमान स्थिति?

SYL नहर की योजना 1981 में बनी थी, लेकिन दशकों बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है:

  • समझौता और निर्माण: 214 किलोमीटर लंबी इस नहर का 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में बन चुका है, लेकिन पंजाब में 122 किलोमीटर का निर्माण ठप है। कई जगहों पर खुदाई को मिट्टी से भरा जा चुका है।

  • कानूनी पेच: 2004 में पंजाब सरकार ने जल समझौते रद्द कर दिए थे, जिसे 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया। फिलहाल पंजाब वाले हिस्से पर ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) बनी हुई है।

  • नहर से पहले पानी: सीएम मान ने स्पष्ट किया कि पहले पानी के बंटवारे का मुद्दा हल हो जाए, उसके बाद नहर निर्माण पर विचार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्रियों की रणनीति

दोनों मुख्यमंत्रियों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार (केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल) के मार्गदर्शन में अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा।


SYL विवाद का टाइमलाइन ग्राफ:

  1. 1981: जल बंटवारे पर समझौता।

  2. 1982: नहर का निर्माण शुरू।

  3. 1990: आतंकी घटनाओं और विवादों के कारण काम बंद।

  4. 2002/2004: सुप्रीम कोर्ट के आदेश बनाम पंजाब सरकार का कानून।

  5. 2016: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के कानून को असंवैधानिक बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *