मोहाली: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के छात्रों के लिए आगामी बोर्ड परीक्षाएं अब आसान नहीं रहने वाली हैं। बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ही 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्रों का पैटर्न पूरी तरह बदल दिया है और डिफिकल्टी लेवल (कठिनाई स्तर) को बढ़ा दिया है। बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब प्रश्नपत्रों में आसान सवालों की संख्या में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है, जबकि मुश्किल सवालों का प्रतिशत 10 फीसदी बढ़ा दिया गया है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य प्रश्नपत्रों को अधिक व्यावहारिक, विचारशील और गुणात्मक बनाना है, ताकि छात्रों की वास्तविक क्षमता का आकलन हो सके।
इस नए बदलाव के बाद अब छात्रों के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों (टेक्स्ट बुक्स) के पीछे दिए गए अभ्यास प्रश्नों का रट्टा लगाकर पास होना या अच्छे अंक लाना संभव नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षा में 25 प्रतिशत प्रश्न सीधे चैप्टर के बीच में से पूछे जाएंगे, जिसका मतलब है कि छात्रों को हर चैप्टर को गहराई से और पूरा पढ़ना होगा। अब तक छात्र अक्सर केवल एक्सरसाइज के प्रश्न याद करके परीक्षा दे देते थे, लेकिन अब उन्हें विषय की गहन जानकारी रखनी होगी। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी निजी और सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों और शिक्षकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
बोर्ड ने प्रश्नपत्रों की संरचना में भी बड़ा फेरबदल किया है। पहले जहां परीक्षा में 40 प्रतिशत प्रश्न ऑब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) होते थे, वहीं अब इनकी संख्या घटाकर 25 प्रतिशत कर दी गई है। इसी तरह, पहले प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत प्रश्न औसत से आसान होते थे, जिन्हें घटाकर अब 30 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, औसत से मुश्किल प्रश्नों की संख्या जो पहले 20 प्रतिशत थी, उसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। बाकी 40 प्रतिशत प्रश्न औसत दर्जे के ही रहेंगे। इसके अलावा, अब 75 प्रतिशत प्रश्न टेक्स्ट बुक की एक्सरसाइज से और शेष 25 प्रतिशत चैप्टर के भीतर से तैयार किए जाएंगे।
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को भी सख्त हिदायत दी है कि वे क्लासरूम में पढ़ाने का तरीका बदलें। टीचर्स को अब छात्रों को रट्टा मरवाने के बजाय पूरा चैप्टर समझाना होगा और अपने स्तर पर चैप्टर के बीच से प्रश्न तैयार करवाकर अभ्यास कराना होगा। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से बोर्ड परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के 100 प्रतिशत अंक आ रहे थे, जिससे बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली और परीक्षा के स्तर पर सवाल खड़े हो रहे थे। इसी को देखते हुए बोर्ड ने अब परीक्षाओं का स्तर कठिन करने और स्कोरिंग को चुनौतीपूर्ण बनाने का निर्णय लिया है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
