शिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-जागृति का दिव्य पर्व, जानिए किसने दिए ये प्रवचन

Dharam

जालंधरः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की जालन्धर शाखा बिधिपुर आश्रम में महाशिवरात्रि का पावन महापर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। जिससे वातावरण पूर्णतः शिवमय हो उठा। इस अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी मेधावी भारती जी ने अपने प्रेरणादायी एवं ओजस्वी प्रवचनों से उपस्थित संगत को आध्यात्मिक ज्ञान से अनुप्राणित किया। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-जागृति का दिव्य पर्व है। भगवान शिव का स्वरूप हमें सादगी, समत्व, करुणा, तपस्या और त्याग का संदेश देता है। शिव जटाओं में गंगा धारण करते हैं, कंठ में विष को स्थान देते हैं और मस्तक पर चंद्र धारण कर संतुलन का प्रतीक प्रस्तुत करते हैं—यह सब मानव जीवन के लिए गहन शिक्षाएँ हैं।

साध्वी जी ने समझाया कि सच्ची शिव-भक्ति बाहरी आडंबरों से नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता और ध्यान की साधना से संभव है। जब मनुष्य अपने भीतर व्याप्त काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों का त्याग करता है, तभी वह शिवत्व के समीप पहुँचता है। उन्होंने बताया कि शिवरात्रि की रात्रि आत्मचिंतन, आत्मनिरीक्षण और आत्मपरिवर्तन का स्वर्णिम अवसर है। इस पावन रात्रि में यदि साधक सच्चे मार्गदर्शन में ध्यान साधना करे, तो वह अपने भीतर स्थित दिव्य प्रकाश का अनुभव कर सकता है।

प्रवचन के दौरान साध्वी जी ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए नशामुक्त, चरित्रवान और नैतिक जीवन जीने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को आध्यात्मिक जागृति और नैतिक मूल्यों की अत्यंत आवश्यकता है। शिव का आदर्श जीवन हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए।

कार्यक्रम में भजन-कीर्तन की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “बम बम भोले” और शिव स्तुति के जयघोष से पूरा आश्रम परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु शिव की आराधना में लीन हो गए। आरती और सामूहिक प्रार्थना की गई। जिसमें समाज की सुख-समृद्धि, शांति और सद्भावना के लिए मंगलकामना की गई।

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