Sports Desk: भारतीय क्रिकेट के ‘फिनिशर’ रिंकू सिंह आज अपने जीवन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत हार का सामना कर रहे हैं। उनके पिता, खानचंद सिंह, जो रिंकू के फर्श से अर्श तक के सफर के सबसे बड़े गवाह और प्रेरणा थे, शुक्रवार को जिंदगी की जंग हार गए। स्टेज-4 कैंसर से लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
कैंसर से आखिरी सांस तक लड़े खानचंद सिंह
रिंकू के पिता पिछले कई महीनों से एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित थे। परिवार ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की और ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका लंबा इलाज चला। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार को स्थिति बिगड़ने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, जिससे अलीगढ़ स्थित उनके पैतृक निवास और पूरे क्रिकेट जगत में गम का माहौल है।
फर्ज और भावना के बीच रिंकू का संघर्ष
रिंकू सिंह के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। एक तरफ पिता की मरणासन्न स्थिति थी, तो दूसरी तरफ देश के लिए खेलने की जिम्मेदारी। पिता की हालत बिगड़ने की खबर मिलते ही रिंकू टूर्नामेंट से ब्रेक लेकर घर रवाना हुए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए वे 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के लिए टीम से वापस भी जुड़ गए थे। अब पिता के अंतिम संस्कार के लिए वे पुनः अपने गृह नगर अलीगढ़ पहुँचेंगे।
दिग्गजों ने बढ़ाया ढांढस: “वाहेगुरु परिवार को शक्ति दें”
इस दुखद खबर के मिलते ही सोशल मीडिया पर संवेदनाओं का तांता लग गया है:
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हरभजन सिंह का भावुक संदेश: पूर्व दिग्गज स्पिनर ने लिखा, “यह रिंकू और उनके परिवार के लिए परीक्षा की घड़ी है। ऐसी स्थिति में भी अपनी जिम्मेदारी निभाना रिंकू के मजबूत चरित्र को दर्शाता है। मेरी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।”
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BCCI की ओर से शोक: बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी इस क्षति को अपूरणीय बताते हुए रिंकू और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
संघर्ष की नींव थे पिता खानचंद
रिंकू सिंह की सफलता की कहानी उनके पिता के बिना अधूरी है। जिस पिता ने कभी घर-घर सिलेंडर पहुँचाकर रिंकू के सपनों को सींचा, आज उसी बेटे को अपने कंधों पर पिता का अंतिम बोझ उठाना होगा। अलीगढ़ में होने वाले अंतिम संस्कार में खेल और राजनीति जगत की कई हस्तियों के जुटने की उम्मीद है।
