Sheetala Ashtami 2026 Today: आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन आरोग्य और शीतलता की अधिष्ठात्री देवी, माता शीतला की विशेष पूजा और व्रत किया जाता है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। इस त्योहार को उत्तर भारत के कई हिस्सों में ‘बासोड़ा’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है बासी भोजन का भोग लगाना।
शीतला अष्टमी 2026: पूजन का शुभ मुहूर्त
धार्मिक पंचांग के अनुसार, शीतला अष्टमी का पर्व आज 11 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। पूजन के लिए आज पूरे दिन का समय बहुत ही शुभ माना गया है।
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पूजन मुहूर्त: सुबह 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक।
बासोड़ा परंपरा: माता को क्यों लगता है ठंडे भोजन का भोग?
शीतला अष्टमी की सबसे खास बात यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। सप्तमी तिथि (एक दिन पहले) को ही मीठे चावल (ओलिया), दही बड़े, पूड़ी, रबड़ी और अन्य पकवान तैयार कर लिए जाते हैं। अष्टमी के दिन माता शीतला को इन्हीं बासी व्यंजनों का भोग लगाया जाता है और परिवार के सदस्य भी इसी ठंडे प्रसाद को ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इस दिन के बाद से मौसम में गर्मी बढ़ जाती है, इसलिए शरीर को शीतलता प्रदान करने के लिए अंतिम बार ठंडा भोजन किया जाता है।
बीमारियों से रक्षा करती हैं शीतला माता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला को चेचक (Smallpox) और खसरा जैसे संक्रामक रोगों की देवी माना जाता है। विधि-विधान से पूजा करने पर:
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बच्चों की चेचक, खसरा और त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा होती है।
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शरीर में ज्वर (बुखार) और जलन का प्रभाव कम होता है।
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परिवार में सुख, शांति और आरोग्यता का वास होता है।
शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व
शीतला अष्टमी का पर्व मौसम परिवर्तन का प्रतीक है। बसंत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) के आगमन के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। माता शीतला, जिनके हाथ में झाड़ू और कलश है, स्वच्छता और शीतलता का संदेश देती हैं। यह पूजा हमें स्वच्छता के प्रति जागरूक करती है और प्रार्थना की जाती है कि बढ़ती गर्मी में माता की कृपा से शरीर स्वस्थ और शीतल रहे।
