चंडीगढ़: हरियाणा के हालिया राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि कांग्रेस एक सीट जीतने में कामयाब रही, लेकिन इस चुनावी प्रक्रिया ने पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह और गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया है। चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रमों और विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा आज एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राजभवन कूच करेंगे। हुड्डा के साथ कांग्रेस के तमाम विधायक भी मौजूद रहेंगे, जो राज्यपाल प्रो. असीम घोष से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का सीधा आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए इस चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है। हुड्डा के अनुसार, भाजपा ने रणनीति के तहत अपने ही प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल को एक ‘निर्दलीय’ उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा ताकि कांग्रेस के खेमे में सेंध लगाई जा सके। उन्होंने विधानसभा में भी इस बात पर जोर दिया था कि भाजपा ने कांग्रेस विधायकों को प्रलोभन देकर खरीदने का प्रयास किया और जब कई विधायक उनके दबाव में नहीं आए, तो योजनाबद्ध तरीके से कांग्रेस के वोटों को निरस्त करवा दिया गया।
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के इन तमाम दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सदन में अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर केवल संजय भाटिया को ही अपना उम्मीदवार बनाया था और वे पूरे बहुमत के साथ विजयी हुए हैं। सतीश नांदल के मामले पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वे एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे और लोकतंत्र में हर प्रत्याशी को किसी से भी समर्थन या वोट मांगने का पूरा हक है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे खरीद-फरोख्त के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यों से परे हैं। अब देखना यह होगा कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद यह सियासी लड़ाई क्या नया मोड़ लेती है।