Punjab Desk: पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मांवां-धीयां दा सत्कार’ योजना के तहत 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि पाने के लिए उत्साहित महिलाओं के सामने एक भावनात्मक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। सूबे की हजारों जरूरतमंद महिलाएं, जो रोजाना गोबर थापती हैं, पशुओं के लिए चारा काटती हैं या दूसरों के घरों में बर्तन मांजती हैं, उनकी अंगुलियों की लकीरें कड़ी मेहनत के कारण घिस चुकी हैं। इस वजह से बैंकों में उनका बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन (अंगूठे का निशान) सफल नहीं हो पा रहा है, जिससे उनके आधार कार्ड बैंक खातों से लिंक नहीं हो पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री हुए व्यथित, समाधान के लिए दिए सख्त निर्देश
ग्रामीण महिलाओं की इस पीड़ा और संघर्ष की जानकारी जब मुख्यमंत्री भगवंत मान तक पहुँची, तो वे खासे भावुक और व्यथित नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन हाथों ने मेहनत कर पंजाब को सींचा है, उनकी घिसी हुई लकीरें सरकार की कल्याणकारी योजना के आड़े नहीं आने दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने तुरंत मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के उच्च अधिकारियों को राज्य के विभिन्न बैंकों के प्रबंधकों के साथ आपातकालीन बैठक करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस समस्या का कोई वैकल्पिक और सुगम समाधान निकाला जा सके।
योजना का दायरा और पंजीकरण की तैयारी
पंजाब सरकार का दावा है कि इस ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) योजना के दायरे में राज्य की लगभग 97 प्रतिशत महिलाएं आएंगी। योजना से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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पंजीकरण: 13 अप्रैल (बैसाखी) से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
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पात्रता: पंजाब की वे सभी महिलाएं जो राज्य की वोटर हैं (सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को छोड़कर)।
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वित्तीय लाभ: 1,000 रुपये प्रति माह सीधे बैंक खाते में जमा किए जाएंगे।
बैंकों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री मान ने अधिकारियों से कहा है कि वे बैंकों के साथ तालमेल बिठाएं ताकि जिन महिलाओं के फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो रहे हैं, उनके लिए ‘आईरिस स्कैन’ (आँखों की पुतली का मिलान) या अन्य वैकल्पिक सत्यापन विधियों का उपयोग किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र महिला केवल तकनीकी कारणों से इस सम्मान राशि से वंचित न रहे।