हरियाणा में पंचायती जमीन पर कब्जा करना अब नामुमकिन: सरकार ने शामलात देह और रास्तों के लिए जारी किए कड़े नियम

Haryana

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती भूमि (शामलात देह) के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब गांवों की जमीनों और रास्तों पर अवैध कब्जा करने वालों या निजी फायदे के लिए पंचायत की जमीन का इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा कस दिया गया है।

इस नई नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. निजी रास्तों (Access Road) के लिए अब ‘ग्राम सभा’ की मंजूरी अनिवार्य

अब कोई भी बिल्डर, निजी कंपनी या रसूखदार व्यक्ति आसानी से पंचायती जमीन से अपने प्रोजेक्ट के लिए रास्ता नहीं निकाल पाएगा। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:

  • ग्राम सभा का प्रस्ताव: केवल सरपंच या कुछ पंचों की सहमति अब काफी नहीं होगी; पूरे गांव की ग्राम सभा में प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है।

  • भारी बहुमत: पंचायत के कम से कम तीन-चौथाई (75%) सदस्यों का समर्थन मिलने पर ही फाइल आगे बढ़ेगी।

  • बाजार दर पर शुल्क: जमीन के इस्तेमाल के बदले संबंधित व्यक्ति या कंपनी को मार्केट रेट या निर्धारित कलेक्टर रेट के अनुसार भारी शुल्क चुकाना होगा।

2. अवैध कब्जों पर चलेगा ‘पीला पंजा’

सरकार ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति के साथ कोई समझौता नहीं होगा:

  • नो रेगुलराइजेशन: सार्वजनिक रास्तों, गांव की बाहरी सड़क (फिरनी) और तालाबों की जमीन पर किए गए किसी भी अवैध निर्माण को नियमित (Regularize) नहीं किया जाएगा।

  • डिजिटल निगरानी: ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग के जरिए उन रास्तों की पहचान की जा रही है जहाँ दीवारें खड़ी कर कब्जा किया गया है। प्रशासन को इन कब्जों को तुरंत ढहाने के निर्देश दिए गए हैं।

3. मालिकाना हक के लिए भी कड़े नियम

‘मुख्यमंत्री शहरी/ग्रामीण आवास योजना’ के तहत 20 साल से पुराने मकानों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन इसमें कुछ सख्त शर्तें जोड़ी गई हैं:

  • रास्ता रोकना पड़ेगा महंगा: यदि कोई मकान किसी सार्वजनिक रास्ते में बाधा डाल रहा है, तो उसे मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा।

  • जल निकासी और फिरनी: ड्रेनेज (निकासी) और फिरनी की जमीन पर बने निर्माणों को किसी भी सूरत में कोई छूट नहीं मिलेगी।

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