चंडीगढ़: पंजाब में भगवंत मान सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के अब जमीनी स्तर पर सार्थक परिणाम दिखने लगे हैं। यह अभियान केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को इलाज, परामर्श और सबसे महत्वपूर्ण ‘रोजगार’ देकर मुख्यधारा में वापस लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
रोजगार बना सुधार की नींव
नशे से उबरने वाले कई युवाओं के लिए स्थिर नौकरी एक संजीवनी साबित हुई है। अभिषेक (बदला हुआ नाम) जैसे युवाओं का कहना है कि दोबारा नौकरी मिलने से उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। रोजगार ने न केवल उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता दी, बल्कि समाज में खोया हुआ सम्मान भी वापस दिलाया। अब वे अपने परिवारों के साथ एक खुशहाल और अनुशासित जीवन जी रहे हैं।
भावनात्मक सहयोग और उचित इलाज
इस बदलाव में परिवारों का समर्थन और व्यवस्थित चिकित्सीय इलाज सबसे अहम रहा है। नवदीप (बदला हुआ नाम) की कहानी बताती है कि कैसे मां के प्रोत्साहन और पुनर्वास केंद्र की सहायता से उसने नशा छोड़ा। आज वह निजी क्षेत्र में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक स्थिरता के बिना रिकवरी अधूरी रहती है, इसलिए सरकार पुनर्वास को सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ रही है।
सामाजिक और आर्थिक एकीकरण
गुरजिंदर (बदला हुआ नाम) जैसे कई उदाहरण हैं जिनका स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंध नशे के कारण खत्म हो चुके थे, लेकिन अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और काम पर लौट आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की रणनीति नशा पीड़ितों को अपराधी के बजाय ‘मरीज’ मानकर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की है, ताकि वे दोबारा इस दलदल में न फंसें।
नशा-मुक्त जीवन का संदेश
नशे से जंग जीत चुके ये युवा अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि नशा सब कुछ बर्बाद कर देता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और काम मिलने से एक नया और सम्मानजनक जीवन संभव है। ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान अब रिकवरी को अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक स्थिर भविष्य की शुरुआत के रूप में देख रहा है।