Punjab Desk: पंजाब की सियासत में हलचल उस समय तेज हो गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजीव अरोड़ा से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। लुधियाना में हुई इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही ईडी ने आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर भी दबिश दी थी।
छापेमारी के पीछे का कारण
ईडी की यह जांच मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सौदों में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने औद्योगिक भूखंडों (Industrial Plots) का उपयोग आवासीय परियोजनाओं (Residential Projects) के लिए करके राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाया है। ईडी ने वर्ष 2024 में भी संजीव अरोड़ा के ठिकानों की तलाशी ली थी। बता दें कि जुलाई 2025 में मंत्री बनने से पहले संजीव अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे।
आप का तीखा पलटवार
आम आदमी पार्टी ने इस छापेमारी को केंद्र सरकार की ‘चुनावी रणनीति’ करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह एक स्पष्ट पैटर्न है कि भाजपा किसी भी राज्य में चुनाव से पहले ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करके विपक्ष को डराने की कोशिश करती है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की तीखी प्रतिक्रिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य आम आदमी पार्टी को निशाने पर लेना है। मान ने कहा, “ये लोग चुनाव जनता के दम पर नहीं, बल्कि ईडी और सीबीआई के दम पर जीतना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के बाद अब हमारे मंत्रियों और सांसदों को डराया जा रहा है क्योंकि भाजपा को 2027 के चुनावों के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने दावा किया कि संजीव अरोड़ा को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने लुधियाना में भाजपा को बुरी तरह हराया था।
संजीव अरोड़ा का बयान
अपने ठिकानों पर हुई छापेमारी पर संजीव अरोड़ा ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “ईडी ने मेरे ठिकानों पर छापेमारी की है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं एजेंसियों का पूरा सहयोग करूँगा और मुझे विश्वास है कि अंत में सत्य की ही जीत होगी।”
फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से पंजाब की राजनीति में राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं सत्ताधारी आम आदमी पार्टी इसे आगामी चुनावों को प्रभावित करने की एक सोची-समझी साजिश बता रही है।