चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए आवंटित करोड़ों की राशि बिना इस्तेमाल किए ही वापस (लैप्स) हो गई है। शिक्षा विभाग की इस वित्तीय विफलता ने राज्य की शैक्षणिक बुनियादी सुविधाओं पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। समय पर बजट खर्च न होने के कारण विद्यार्थियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का काम रुक गया है।
बजट के खेल में पिछड़ीं महत्वपूर्ण परियोजनाएं
विभाग के पास पर्याप्त धन उपलब्ध था, लेकिन योजना और क्रियान्वयन की कमी के कारण भारी नुकसान हुआ:
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करोड़ों की राशि वापस: पूरे वित्त वर्ष में करीब 400 करोड़ रुपये की राशि लैप्स हो गई। इसमें से 225 करोड़ रुपये की 15 महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरे साल फाइलों में ही दबी रहीं।
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इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट: स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 310 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन इसमें से एक भी रुपया खर्च नहीं किया जा सका।
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प्रमुख योजनाओं की विफलता: शिक्षा की बड़ी योजनाओं के लिए 1,415 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन विभाग केवल 240 करोड़ रुपये (कुल बजट का एक छोटा हिस्सा) ही उपयोग कर पाया।
इन कार्यों पर पड़ा बुरा असर
बजट वापस जाने के कारण स्कूलों में निम्नलिखित आवश्यक कार्य नहीं हो सके:
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स्कूल भवनों का निर्माण: नए भवनों के बनने की प्रक्रिया रुक गई।
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मरम्मत और विस्तार: पुराने स्कूलों की मरम्मत और कक्षाओं के विस्तार का काम बीच में ही अटक गया।
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बुनियादी सुविधाएं: शौचालय, स्वच्छ पेयजल और बिजली जैसी अनिवार्य सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर सके।
विद्यार्थी और शिक्षक परेशान
बजट लैप्स होने का सीधा खामियाजा छात्रों और अध्यापकों को भुगतना पड़ रहा है। पर्याप्त फंड होने के बावजूद स्कूलों में सुविधाओं की कमी विभाग की प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करती है। जानकारों का मानना है कि यदि यह राशि समय पर उपयोग होती, तो प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती थी।