श्रीनगर/जालंधर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पंजाब के जालंधर और अमृतसर में हुए हालिया धमाकों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उनके इस बयान के बाद विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
धमाकों पर प्रतिक्रिया: “इसमें कोई नई बात नहीं”
पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों की हाई अलर्ट और धमाकों की जांच के बीच फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं और इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके इस रुख को संवेदनहीन बताते हुए राजनीतिक गलियारों में उनकी आलोचना की जा रही है। गौरतलब है कि जालंधर और अमृतसर में हुए इन धमाकों की जांच फिलहाल एनआईए (NIA) और स्थानीय पुलिस कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर और युद्ध की निरर्थकता पर विचार
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा करते हुए अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि इस अभियान ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है, लेकिन उन्होंने सैन्य संघर्ष के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा:
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युद्ध समाधान नहीं: अब्दुल्ला के अनुसार, युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं है; यह केवल तबाही, दुख और बर्बादी लेकर आता है।
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वैश्विक आर्थिक संकट: उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में दुनिया के देश आर्थिक रूप से इतने मजबूत नहीं हैं कि वे किसी बड़े युद्ध का बोझ उठा सकें।
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ऊर्जा और मानवीय संकट: यूक्रेन और मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के हालातों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट और युद्ध से उपजी परिस्थितियां पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही हैं।
शांति की अपील
फारूक अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही समस्याओं के समाधान का सही तरीका है। उन्होंने कहा कि युद्ध से हालात और अधिक खराब होते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।