नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर! आज हम बात करेंगे एक ऐसे मामले की, जिसने पूरे हरियाणा को हिलाकर रख दिया है। एक 19 साल की मासूम शिक्षिका, मनीषा, की बेरहमी से हत्या… और इस हत्याकांड में पुलिस की ऐसी लापरवाही, जिसने न सिर्फ परिवार को, बल्कि पूरे समाज को गुस्से से भर दिया।क्या ये हत्या थी या आत्महत्या? पुलिस का सुसाइड नोट वाला दावा कितना सच है? और आखिर क्यों इस केस को CBI को सौंपा गया?
‘आपकी बेटी किसी के साथ भाग गई’
11 अगस्त 2025, भिवानी के लोहारू में एक प्ले स्कूल टीचर, मनीषा, अपने स्कूल से निकलीं। वो एक नर्सिंग कॉलेज में B.Sc नर्सिंग कोर्स के बारे में जानकारी लेने गई थीं। लेकिन उस दिन वो घर वापस नहीं लौटीं।उनके पिता ने उसी रात लोहारू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने क्या किया?पुलिस ने कहा, “आपकी बेटी शायद किसी के साथ भाग गई होगी, वो वापस आ जाएगी।” दोस्तों, ये था पुलिस का पहला रिएक्शन! क्या आप यकीन कर सकते हैं? एक लड़की लापता है, और पुलिस बिना जांच के ये मान लेती है कि वो भाग गई है?
बच सकती थी मनीषा!
दो दिन बाद, 13 अगस्त को, सिंघानी गांव के खेतों में एक नहर के पास मनीषा का शव मिला।
शुरुआती जांच में पता चला कि मनीषा की बेरहमी से हत्या की गई थी। गले पर गहरे घाव, शरीर पर चोटें… ये दृश्य देखकर परिवार और गांव वाले गुस्से से भर उठे। लेकिन सवाल ये है – अगर पुलिस ने पहले दिन ही शिकायत पर ध्यान दिया होता, तो क्या मनीषा की जान बच सकती थी?
पुलिस ने 5 दिन तक क्या छुपाया?
दोस्तों, अब कहानी में एक नया ट्विस्ट आता है। पुलिस ने 18 अगस्त को अचानक दावा किया कि मनीषा ने आत्महत्या की थी। पुलिस का कहना है कि मनीषा के शव के पास एक बैग में सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था कि वो अपने माता-पिता से दुखी थीं और कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर रही हैं। लेकिन रुकिए! अगर ये नोट पहले दिन मिला था, तो पुलिस ने 5 दिन तक इसे क्यों छुपाया? और अगर ये आत्महत्या थी, तो फिर हत्या का केस क्यों दर्ज किया गया?मनीषा के पिता संजय का कहना है, “मेरी बेटी इंग्लिश में ऐसा नोट नहीं लिख सकती थी। वो आत्महत्या नहीं कर सकती।” क्या ये पुलिस की साजिश थी या सचमुच आत्महत्या थी?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की धमकी
और दोस्तों, अब इस केस में एक और सनसनीखेज मोड़! लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ऑनलाइन धमकी दी कि अगर पुलिस ने मनीषा के हत्यारों को नहीं पकड़ा, तो वो खुद हत्यारों को सजा देंगे। पुलिस अब तक न तो मनीषा का मोबाइल फोन ढूंढ पाई, न ही कीटनाशक की बोतल, और न ही उस दुकान का पता, जहां से मनीषा ने कथित तौर पर कीटनाशक खरीदा था।लोगों के गुस्से और विपक्ष के दबाव के बाद, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी को मजबूरन इस केस को CBI को सौंपना पड़ा।
दोस्तों, मनीषा हत्याकांड ने न सिर्फ पुलिस की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि हरियाणा में कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। क्या मनीषा को इंसाफ मिलेगा? आपकी इस पर क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
