Punjab Desk: चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में राज्य की सुरक्षा और नागरिक-सैन्य तालमेल को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह द्वारा कार्यभार संभालने के बाद हुई इस पहली शिष्टाचार भेंट के दौरान सीमा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, राहत कार्यों और रणनीतिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री मान ने पंजाब की करीब 550 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा का हवाला देते हुए इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नागरिक प्रशासन और सेना के बीच एक मजबूत समन्वित ढांचा होना अनिवार्य है। बैठक में इस बात पर विशेष सहमति बनी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे सभी विकास और सुरक्षा प्रोजेक्टों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ समय पर पूरा किया जाएगा ताकि सेना की ऑपरेशनल क्षमता में वृद्धि हो सके।
इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने प्राकृतिक आपदाओं और बाहरी खतरों जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक प्रभावी जवाबी रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक और कल्याणकारी मुद्दों पर भी संवाद हुआ, जिसमें अग्निवीरों का पुनर्वास, युवाओं का सशक्तिकरण, सेना में भर्ती की प्रक्रिया और पूर्व सैनिकों के लिए आवासीय परियोजनाओं जैसे विषय शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार भारतीय सेना की हर पहल में पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रशासन की ओर से सेना को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के साथ-साथ ब्रिगेडियर समीर ठक्कर, कर्नल जसदीप संधू और पश्चिमी कमान के अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।