तरनतारन डेस्क: पंजाब प्रशासनिक सेवा (PCS) के स्तर पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। तरनतारन की पट्टी पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम (SDM) और वर्तमान PCS अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया है। यह हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी राजस्थान–जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे (NH-54) के निर्माण के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में करीब ₹1.63 करोड़ के कथित गबन के मामले में की गई है। पुलिस ने आज सुबह लगभग 7 बजे मुस्तैदी दिखाते हुए अधिकारी के सरकारी आवास पर रेड की और उन्हें हिरासत में ले लिया।
क्या है पूरा घोटाला? (अपात्र लोगों को किया फर्जी भुगतान)
यह मामला नेशनल हाईवे-54 के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे के वितरण से जुड़ा है।
-
फर्जीवाड़ा: आरोप है कि पट्टी में एसडीएम के पद पर रहते हुए अनुप्रीत कौर रंधावा ने सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की। उन्होंने लापरवाही या मिलीभगत के चलते मुआवजे की मोटी रकम ऐसे लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी, जिनकी जमीन प्रोजेक्ट में आई ही नहीं थी।
-
करोड़ों का गबन: जांच में आधिकारिक रूप से सामने आया है कि करीब 1.63 करोड़ रुपये की सरकारी राशि अमृतसर और तरनतारन क्षेत्र के ऐसे 5 लोगों को बांट दी गई, जिनका नाम भूमि अधिग्रहण की सरकारी अधिसूचना (Notification) के रिकॉर्ड में दूर-दूर तक शामिल नहीं था।
2018 से चल रही थी जांच, अब जाकर फंसा शिकंजा
इस घोटाले की परतें साल 2018 में खुलनी शुरू हुई थीं। उस समय पट्टी के तत्कालीन एसडीएम नवराज सिंह बराड़ ने मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाते हुए तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (DC) को एक लिखित शिकायत सौंपी थी।
शिकायत में साफ कहा गया था कि अपात्र और फर्जी लोगों को सरकारी खजाने से मुआवजा बांटा गया है। इसके बाद लंबी प्राथमिक जांच चली और 5 सितंबर 2019 को थाना सिटी पट्टी में आईपीसी (IPC) की धारा 419, 420, 409 और 120B के तहत धोखाधड़ी और गबन का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया था।
आगे की कार्रवाई
इस मामले में पुलिस लंबे समय से सबूत जुटा रही थी, जिसके बाद आज यह बड़ी गिरफ्तारी की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अनुप्रीत कौर रंधावा से गहन पूछताछ शुरू कर दी गई है। इस जांच में आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों और बिचौलियों के नाम सामने आने की पूरी संभावना है।