जालंधर/चंडीगढ़: पंजाब में लगातार बढ़ रही तपिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य में 24 मई तक भीषण लू (Heat Wave) चलने की गंभीर चेतावनी जारी की है। पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिशा से आ रही सूखी व बेहद गर्म हवाओं के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस समय पंजाब का मालवा क्षेत्र भीषण गर्मी की सबसे ज्यादा मार झेल रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को राज्य का औसत तापमान सामान्य से लगभग 3°C अधिक दर्ज किया गया। बठिंडा 47°C तापमान के साथ पंजाब का सबसे गर्म जिला रहा।
बिजली की मांग पहुंची 13,555 मेगावाट पर
भीषण गर्मी और उमस के कारण राज्य में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके चलते सोमवार को बिजली की मांग इस सीजन में पहली बार रिकॉर्ड 13,555 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, शाम के समय तापमान में मामूली गिरावट होने से बिजली की मांग में थोड़ी कमी जरूर देखी गई।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी: जारी हुई गाइडलाइंस
बढ़ते पारे को देखते हुए चंडीगढ़ और पंजाब प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
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दोपहर में बाहर निकलने से बचें: प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बहुत जरूरी काम न होने पर दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलें।
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AC का तापमान 24-25°C रखने के निर्देश: सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, मॉल और कमर्शियल बिल्डिंग्स को बिजली की बचत करने के लिए एसी (AC) का तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखने का आदेश दिया गया है।
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विशेष हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार: गर्मी से बीमार होने वाले मरीजों के त्वरित इलाज के लिए पंजाब के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में विशेष ‘हीट स्ट्रोक वार्ड’ बनाए गए हैं। अस्पतालों में ओआरएस (ORS) और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है। आपातकालीन स्थिति में लोग स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 104 पर मदद ले सकते हैं।
स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश
बच्चों को इस जानलेवा गर्मी से बचाने के लिए शिक्षा और जिला प्रशासन ने स्कूलों को विशेष निर्देश जारी किए हैं:
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प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के छोटे बच्चों को तेज धूप और लू के संपर्क में आने से पूरी तरह बचाया जाए।
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खेलकूद या अन्य बाहरी (Outdoor) गतिविधियां केवल सुबह या शाम के समय ही आयोजित की जा सकेंगी, दोपहर में इन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
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सभी स्कूलों को परिसर में पीने के साफ पानी और वॉटर कूलर्स को सुचारू रूप से चालू रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।