यमुना नदी की सफाई को लेकर पिछले कई दशकों से तमाम योजनाएं बनीं और बड़े-बड़े दावे किए गए। हालांकि, धरातल पर आज तक स्थिति में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है। कभी जिस यमुना के जल को जीवनदायिनी माना जाता था, आज उसका पानी कई जगहों पर न तो पीने लायक बचा है और न ही आचमन के योग्य।
इसी बीच, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यमुना सफाई योजना (Yamuna Cleanliness Project) को लेकर आया एक ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अब जनता के मन में वही पुराना सवाल फिर से कौंध रहा है कि क्या इस बार वाकई यमुना की तस्वीर बदलेगी?
मुख्यमंत्री का बड़ा एलान: ‘यमुना हमारी मां के समान, 2027 तक होगी साफ’
विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बड़ा दावा किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यमुना हमारी मां के समान पवित्र है और हमारी सरकार साल 2027 तक इसे पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त करने का संकल्प ले चुकी है।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार इस मुहिम को लेकर बेहद गंभीर है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर काम करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बहुत जल्द आम जनता को यमुना में स्वच्छ और अविरल जल बहता हुआ दिखाई देगा।
क्या है सरकार का एक्शन प्लान? (The Action Plan)
मुख्यमंत्री ने केवल खोखले वादे नहीं किए, बल्कि इसके लिए सरकार के पूरे रोडमैप और एक्शन प्लान की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि यमुना में गिरने वाले गंदे सीवर के पानी को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक पर काम किया जा रहा है:
-
नए एसटीपी (STP): नदी में गिरने वाले बड़े नालों को रोकने के लिए 6 प्रमुख स्थानों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम तेजी से जारी है, जिन्हें 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।
-
टेंडर प्रक्रिया: इसके अतिरिक्त, 6 अन्य नए प्लांट लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।
-
इंडस्ट्रियल वेस्ट पर लगाम: पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र में सीईटीपी (Common Effluent Treatment Plant) स्थापित किए जा रहे हैं। इससे फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल युक्त गंदे पानी को रिसायकल (शुद्ध) कर दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।
बड़ा सवाल: क्या सिर्फ प्लांट लगाने से साफ होगी यमुना?
जानकारों की राय: पर्यावरण विशेषज्ञों और नदी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी फाइलों में प्लांट लगा देने से यमुना की दशा नहीं सुधरने वाली है।
अतीत में भी ऐसी कई महत्वाकांक्षी योजनाएं आईं और करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहाया गया, लेकिन प्रदूषण कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही गया। जानकारों के अनुसार, जब तक उद्योगों से निकलने वाले अवैध केमिकल डिस्चार्ज, सीवर लाइनों के गलत प्रबंधन और प्लास्टिक कचरे पर जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक Yamuna Cleanliness Project को सफल बनाना बेहद मुश्किल होगा।
अब प्रदेश की जनता की निगाहें साल 2027 के इस नए डेडलाइन पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान एक नई उम्मीद तो जगाता है, लेकिन यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह वादा धरातल पर सच साबित होता है या फिर पुराने वादों की तरह सिर्फ फाइलों और चुनावी बयानों तक ही सिमट कर रह जाता है।