IPL 2009 विवाद: पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को बड़ी राहत, ट्राइब्यूनल ने खारिज किया ED का मामला, रद्द किया 10.65 करोड़ का जुर्माना
न्यूज़ डेस्क: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को अपीलीय अधिकरण (अपीलेट ट्राइब्यूनल) से बहुत बड़ी राहत मिली है। ट्राइब्यूनल ने सफेमा (SAFEMA) के तहत अपना फैसला सुनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के मूल आधार को ही पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ED द्वारा ललित मोदी पर लगाया गया 10.65 करोड़ रुपये का जुर्माना भी रद्द कर दिया गया है।
क्या था IPL 2009 का मामला?
यह पूरा मामला साल 2009 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुए IPL के दूसरे सीजन से जुड़ा है:
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भारत से बाहर आयोजन: 2009 में भारत में आम चुनाव होने के कारण सुरक्षा कारणों से IPL का आयोजन 18 अप्रैल से 24 मई तक दक्षिण अफ्रीका में किया गया था।
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ED का आरोप: उस समय ललित मोदी पर अवैध वित्तीय लेन-देन के आरोप लगे थे। ED का दावा था कि मोदी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड और कुछ अन्य संस्थाओं को अवैध रूप से विदेशी मुद्रा भेजी थी।
ट्राइब्यूनल ने फैसले में क्या कहा?
अपीलीय अधिकरण ने फेमा (FEMA) और सफेमा कानून के तहत समीक्षा करते हुए ED के आरोपों को बेबुनियाद माना:
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‘करंट अकाउंट ट्रांजेक्शन’ करार: ट्राइब्यूनल ने माना कि दक्षिण अफ्रीका में IPL 2009 के दौरान हुआ पैसों का लेन-देन ‘करंट अकाउंट ट्रांजेक्शन’ (Current Account Transaction) था, न कि ‘कैपिटल अकाउंट ट्रांजेक्शन’ (Capital Account Transaction)। इसलिए इसके लिए RBI से विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं थी।
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जिम्मेदारी और वित्तीय अधिकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि ललित मोदी BCCI द्वारा मान्य फेमा नियमों का पालन कराने के लिए निजी तौर पर जिम्मेदार नहीं थे। साथ ही, जिन वित्तीय अधिकारों का जिक्र ED ने किया था, वे अधिकार ललित मोदी के पास थे ही नहीं।
ट्राइब्यूनल के इस फैसले से ED द्वारा वर्षों पहले दिए गए निष्कर्ष पूरी तरह निराधार साबित हो गए हैं और ललित मोदी को बड़ी कानूनी जीत मिली है।


