चंडीगढ़: ट्राइसिटी (चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली) से सटे कस्बों में शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पंजाब सरकार ने कमर कस ली है। स्थानीय निकाय मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज म्यूनिसिपल भवन में कार्यकारी अधिकारियों (Eos) के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने नगर परिषद खरड़, डेराबस्सी, जीरकपुर, नयागांव, बनूड़, कुराली और घड़ूआं के लिए कई बड़ी और समयबद्ध परियोजनाओं की घोषणा की।
कैबिनेट मंत्री ने साफ शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विकास कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा की जाए और समय-सीमा का सख्ती से पालन हो।
250 किलोमीटर से अधिक सड़कों का कायाकल्प
बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इन सात कस्बों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 250 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके साथ ही शहरों की सुंदरता बढ़ाने के लिए प्रमुख सड़क कॉरिडोरों का सौंदर्यीकरण (Beautification) भी किया जाएगा।
पीने के पानी के लिए लगेंगे 50 नए ट्यूबवेल
निवासियों को पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन शहरी स्थानीय निकायों में कुल 50 नए ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं। कस्बों के अनुसार ट्यूबवेलों का विवरण इस प्रकार है:
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खरड़: 15 ट्यूबवेल
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जीरकपुर और नयागांव: 10-10 ट्यूबवेल
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डेराबस्सी: 5 ट्यूबवेल
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लालड़ू: 4 ट्यूबवेल
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बनूड़: 3 ट्यूबवेल
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कुराली: 1 ट्यूबवेल
इसके साथ ही, सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सीवरेज की सफाई का काम भी युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।
अगले 15 दिनों में शुरू होंगी ये महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं
यातायात को सुगम बनाने के लिए स्थानीय निकाय मंत्री ने निम्नलिखित चिन्हित सड़कों का काम अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं:
अधिकारियों को सख्त चेतावनी: “देरी हुई तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई”
जवाबदेही तय करते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री ने कहा: “हम सड़क के हर किलोमीटर, हर ट्यूबवेल और हर समय-सीमा की निगरानी कर रहे हैं। चल रही परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा होगी। यदि किसी अधिकारी की वजह से काम में अनावश्यक देरी पाई गई, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में अब “पैचवर्क का युग” समाप्त हो चुका है। सरकार का ध्यान अस्थायी समाधानों के बजाय स्थायी और भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) शहरी बुनियादी ढांचा विकसित करने पर है।